Kendal Calling

  • Aromatherapy is a type of alternative medicine practice utilizing aromatic essential oils that are derived from a wide variety of healing plants!

  • "Aromatherapy can be performed in Herbs like rosemary, thyme, oregano or peppermint!"  - Seasick Steve

  • "Aromatherapy can be performed in Herbs like Leaves from eucalyptus plants"  - The Independent

  • "I loved Herbion Aromatherapies"  - Mark Chadwick, The Levellers

  • "Aromatherapy can be performed in Zest from fruits such as oranges, grapefruit or lemon!"  - Mr Scruff

  • "Aromatherapy can be performed in Wood or bark from trees including cedar or pine"  - Sunday Times

  • "Aromatherapy can be performed in Resin from frankincense trees!"  - The Charlatans

  • "Aromatherapy can be performed in Grasses, such as lemongrass!"  - Doves

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Thursday, 24 November 2016 08:06

एलर्जी (Allergy)

किसी भी चीज के प्रति अतिसंवेदनशील होना ही एलर्जी है, जिसे स्वास्थ्य की भाषा में एटोपी (atopy) भी कहते हैं। एलर्जी किसी से भी हो सकती है, मौसम में बदलाव से, किसी खाने की चीज से, पालतु जानवर से, धूल से, धुएं से, सौंदर्य प्रसाधनों से या दवाओं आदि से।

एलर्जी में शरीर का इम्यून सिस्टम कुछ खास चीजों को स्वीकार नहीं कर पाता। इन चीजों के प्रति इम्यूनिटी अयोग्य तरह से प्रतिक्रिया देती है। इम्यूनिटी द्वारा दी जाने वाली प्रतिक्रिया ही एलर्जी होती है। यूं देखा जाए तो अधिकतर एलर्जी खतरनाक नहीं होती लेकिन कभी कभी समस्या गंभीर हो जाती है।

एलर्जी को रोका जा सकता है, लेकिन इसके लिए एलर्जी पैदा करने वाले कारणों से पूरी तरह दूर रहना होगा। यूं तो एलर्जी फैलने वाली बीमारी नहीं है फिर भी यदि किसी को नाक बहने और आंखों से पानी आने वाली एलर्जी हो तो उससे संपर्क बनाकर रखने में ही बेहतरी है। संभव हो तो उसके द्वारा इस्तेमाल किए गए सामान को भी इस्तेमाल न करें।

 

एलर्जी भी कई तरह की होती है (Types of Allergy)

1. डस्ट एलर्जी (Dust Allergy)
2. लेटेक्स एलर्जी (Latex Allergy)
3. मोल्ड एलर्जी (Mold Allergy)
4. इन्सेक्ट स्टिंग एलर्जी (Insect Sting Allergy)
5. पालतू जानवर से एलर्जी (Pet Allergy)
6. राइनाइटिस एलर्जी (Rhinitis Allergy)
7. स्किन एलर्जी (Skin Allergy)
8. ड्रग एलर्जी (Drug Allergy)
9. आइ एलर्जी (Eye Allergy)

एलर्जी के लक्षण

 

एलर्जी  के कारण- (cause of allergy)

1. धूल (Dust)
धूल के कण बहुत छोटे जीव होते हैं जो हमारे- आस पास की ज्यादातर वस्तुओं पर रहते हैं। यह कण उच्च आद्रता में पनपते हैं जो मृत त्वचा, बैक्टीरिया और फंगस आदि से अपना खाना प्राप्त करते हैं।

2. कीट (Insect)
कीटों से एलर्जी वाले लोगों को कीटों के काटने से डंक लगने से त्वचा एकदम लाल होकर फूल जाती है। इतना ही नहीं उन्हें उल्टी, चक्कर आना और बुखार भी हो सकता है।

3. खाना (Food)
कुछ लोगों को रोजमर्रा में खायी जाने वाली चीजों से भी एलर्जी होती है, जैसे मूंगफली, दूध और अंडा आदि। खाद्य पदार्थ से एलर्जी वाले लोगों को खाने के बाद जी मिचलाने, शरीर में खुजली होने या दाने निकलने की समस्या हो सकती है।

4. रबड़ (Latex)
रबड़ से बना कोई भी उत्पाद, एलर्जी का कारण हो सकता है। कुछ लोगों को रबड़ से बने उत्पाद भी नुकसान पहुंचाते हैं, जैसे दस्ताने, कंडोम, मेडिकल उपकरण आदि के इस्तेमाल से जलन, नाक बहना, छींकना, सांस की घबराहट और खुजली की समस्याएं हो सकती हैं।

5. खुशबू (Fragrance)
अच्छी खुशबू भले अच्छी लगती हो लेकिन यह भी कुछ लोगों की एलर्जी का कारण हो सकती है। परफ्यूम, खुशबू वाली मोमबत्तियां, कई तरह के ब्यूटी प्रॉडक्ट आदि की खुशबू से सिर दर्द, जी मिचलाने और नाक की एलर्जी हो सकती है।

6. जानवर (Pets)
पालतु जानवर भी कई लोगों की एलर्जी का कारण होते हैं। जानवरों के बाल, उनके मुंह से निकलने वाली लार, रूसी आदि से कई गंभीर परेशानियां हो सकती हैं।

7. घास (Grass)
कई बार घास, पेड़ और फूल भी एलर्जी का कारण होते हैं। यह सब मौसमी एलर्जी का कारण होते हैं, जिनसे खुजली, आंखों में जलन, लगातार छींक आना और खुजली आदि की समस्या हो सकती है।

सामान्य उपचार

 एलर्जी से निजात पाने के लिए उपाय (Tips to Prevent Allergy)

- धूल, धुंआ और गंदगी से बचकर रहें।
- कुछ दवाओं जैसे एस्पिरीन, निमुसलाइड आदि के सेवन में सावधानी बरतें।
- खट्टी चीजों, जैसे अचार आदि का इस्तेमाल कम करें।
- ऐसे खाद्य पदार्थ जिन्हें खाने से एलर्जी है, उन्हें न खाएं।
- गंदगी से एलर्जी वाले लोगों को समय-समय पर चादर, तकिये के कवर और पर्दे आदि बदलते रहने चाहिए।

Thursday, 24 November 2016 08:02

पेट के निचले हिस्से में या मुत्राशय में तेज दर्द पथरी की निशानी हो सकती है। यह एक ऐसी समस्या है जो किसी भी इंसान को हो सकती है। गुर्दे की पथरी में जो दर्द होता है वह बेहद असहनीय हो जाता है। इस बीमारी को समझना और इससे दूर रहने के उपाय जानना बेहद आवश्यक है। 

 

गुर्दे की पथरी (About Kidney Stone in Hindi) 

गुर्दे की पथरी (Gurde ki Pathri) की समस्या तब पैदा होती है जब गुर्दे (Kidney) के अंदर छोटे-छोटे पत्थर बन जाते है। ये आमतौर पर मध्य आयु यानि चालीस साल या उसके बाद पता लगने शुरू होते है। लेकिन ऐसा जरूरी नहीं है। गुर्दे की पथरी कम आयु वाले बच्चों और युवाओं में भी देखने को मिलती है। 

मूत्र में पाये जाने वाले रासायनिक तत्वों से मूत्र के अंगों में पथरी बनती है। इन तत्वों में यूरिक एसिड, फास्फोरस कैल्शियम और ओ़क्जेलिक एसिड शामिल हैं। लगभग 90 प्रतिशत पथरी का निर्माण कैल्शियम ओक्जेलेट (Calcium Oxalate) से होता है। 

गुर्दे में एक समय में एक या अधिक पथरी हो सकती है। सामान्यत: ये पथरियाँ बिना किसी तकलीफ के मूत्रमार्ग से शरीर से बाहर निकल जाती हैं। हालांकि, यदि ये पर्याप्त रूप से बड़ी हो जाएं, 2-3 मिमी, तो ये मूत्रवाहिनी में अवरोध उत्पन्न कर सकती हैं। इस स्थिति में मूत्रांगो के आस-पास असहनीय पीड़ा होती है। 

गुर्दे की पथरी (Kidney Stone) का दर्द आमतौर पर काफी तेज होता है। पथरी जब अपने स्थान से नीचे की तरफ़ खिसकती है तब यह दर्द पैदा होता है। पथरी गुर्दे से खिसक कर युरेटर और फिर यूरिन ब्लैडर में आती है।

 

बच्चों में पथरी (Kidney Stone in Kids)

कुपोषित बच्चों के मूत्राशय में पत्थर कभी-कभी सामान्य से बड़े बन जाते हैं। ये कुपोषण के कारण शरीर के प्रोटीन के टूट जाने के कारण बनते है। जिसमें पेशाब में फालतू पदार्थों का जमाव हो जाता है। ये कण लवणों के जमाव के लिए केन्द्रक के रूप में काम करते हैं।

गुर्दे की पथरी के लक्षण

 

 

गुर्दे की पथरी के कारण (Reason of Kidney Stone)
पेशाब की पथरी पेशाब में उपस्थित लवणों व खनिजों के जमाव से बनती हैं। जब लवणों और खनिजों की परतें विभिन्न जगहों पर जमा होती जाती हैं तो इन महीन पत्थरों का आकार बढ़ता जाता है। ये सभी लवण और खनिज खाने की चीजों व पानी से शरीर में आए होते है। कुछ सब्जियां जैसे पालक, अरबी के पत्ते और टमाटरों में बहुत अधिक लवण होते हैं।

जमीनी पानी में भी काफी सारे लवण होते हैं। कुएँ या बोरवेल का पानी भी पथरी बनने का कारण होता है। ये लवण धीरे-धीरे करके शरीर में जमा हो जाते हैं और पत्थर बना लेते हैं। 

फॉस्फेट और कॉर्बोनेट के पत्थरों की सतह मुलायम होती है और ऑक्जेलेट के पत्थरों की खुरदुरी । इस कारण से ऑक्जेलेट के पत्थरों के कारण खून भी निकल सकता है।

 

गुर्दे की पथरी के कारण (Causes of Kidney Stone)

पथरी एक आम बीमारी है जो अकसर गलत-खानपान के कारण भी हो जाती है। इस बीमारी के कुछ मुख्य कारण निम्न हैं: 

  • हर दिन पानी की पर्याप्त मात्रा का सेवन न करना
  • कैफीन और शराब का अधिक उपयोग करना
  • मूत्र मार्ग में संक्रमण होना

सामान्य उपचार

गुर्दे की पथरी होने पर कई बार घरेलू उपाय भी कारगर होते हैं। गुर्दे की पथरी होने पर ज्यादा से ज्यादा खान-पान पर ध्यान देना चाहिए। इसके अलावा गुर्दे की पथरी होने पर निम्न उपाय भी अपनाने चाहिए जैसे: 

गुर्दे की पथरी का इलाज (Treatment of Kidney Stone in Hindi)

  • पथरी के मरीज को दिन में कम से कम 5-6 लीटर पानी पीना चाहिये। पथरी होने पर पर्याप्त जल पीयें ताकि 2 से 2.5 लीटर मूत्र रोज बने। अधिक मात्रा में मूत्र बनने पर छोटी पथरी मूत्र के साथ निकल जाती है
  • आहार में प्रोटीन, नाइट्रोजन तथा सोडियम की मात्रा कम हो। 
  • ऐसा भोजन करें जिनमें आक्जेलेट् की मात्रा अधिक हो; जैसे चाकलेट, सोयाबीन, मूंगफली, पालक, आदि के साथ कोल्ड ड्रिंक्स से दूर रहें। 
  • नारंगी आदि का रस (जूस) लेने से पथरी का खतरा कम होता है। 
  • डॉक्टर पथरी के मरीजों को अंगूर और करेला आदि भी खाने की सलाह देते हैं। 
Thursday, 24 November 2016 07:57

स्वाइन फ्लू या H1N1 (H1N1 Flu) एक संक्रमण है, जो इन्फ्लूएंजा ए वायरस (Influenza Virus) के कारण होता है। आमतौर पर यह बीमारी सूअरों में होती है, इसलिए इसे स्वाइन फ्लू कहा जाता है, लेकिन कई बार सूअर के सीधे संपर्क में आने पर यह मनुष्य में भी फैल जाती है। यह बहुत जल्दी फैलने वाला रोग है। इससे बचने के लिए संक्रमित लोगों से दूर रहना चाहिए। 

 

भारत में स्वाइन फ्लू (Swine Flu in India)
स्वाइन फ्लू वर्ष 2009 में भी फैला था जिसके कारण देश भर कई लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। हालांकि, वर्ष 2015 में फैल रहा स्वाइन फ्लू का वायरस पिछली बार की तुलना में कम घातक है। स्वाइन फ्लू के वायरस से संक्रमित मरीज में लक्षण नजर आने से लेकर अगले सात दिनों तक इसका संक्रमण बना रहता है। साथ ही इससे जुड़ा एक तथ्य यह भी है कि स्वाइन फ्लू सर्दियों में अधिक प्रभावी होता है। 

स्वाइन फ्लू के लक्षण

 

 

माना जाता है कि स्वाइन फ्लू अधिकतर सूअरों के करीब रहने वाले लोगों में तेजी से फैलता है। हालांकि कई अन्य कारक भी है जो स्वाइन फ्लू के लिए जिम्मेदार हैं लेकिन इनमें से सबसे महत्वपूर्ण कारण है सूअरों का संपर्क। कुछ अन्य कारक निम्न हैं: 

स्वाइन फ्लू के कारण (Causes of Swine Flu)

  • संक्रमित सूअरों के साथ रहने वाले व्यक्ति स्वाइन फ्लू की चपेट में आ सकते हैं तथा आगे चलकर वे व्यक्ति अन्य लोगों को संक्रमित कर सकते हैं।
  • बीमारी के होने का खतरा बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और दिल, किडनी, डायबिटीज से ग्रस्त लोगों में अधिक रहता है। जिनकी रोग-प्रतिरोधक क्षमता कम होती है, वे भी स्वाइन फ्लू का शिकार हो सकते हैं।
  • यहां यह ध्यान रखने वाली बात है कि सही तरह से पके हुए रेड मीट से स्वाइन फ्लू नहीं होता लेकिन अगर पकाने में असावधानी बरती जाए तो कुछ समस्याएं अवश्य आ सकती हैं। 

सामान्य उपचार

स्वाइन से बचाव का सबसे बेहतरीन तरीका है इससे बचकर रहना। संक्रमित रोगी से दूर रहकर इस बीमारी से आसानी से बचा जा सकता है। कुच अन्य उपाय निम्न हैं: 

स्वाइन फ्लू से बचाव (Prevention of Swine Flu in Hindi)

  • संक्रमित लोगों से दूर रहना ही इस बीमारी का बचाव है। 
  • साफ-सफाई का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। 
  • खांसते या छींकते समय रुमाल का प्रयोग करें। 
  • गंदे हाथों से आंख, नाक या मुंह छूने से बचें और बाहर खाने से परहेज करें। 
  • बीमार लोगों से नज़दीकी संपर्क रखने से बचें
  • अस्पताल या अन्य किसी सार्वजनिक स्थान पर जाने से पहले मास्क पहनें। 
  • संक्रमित व्यक्ति के पास जाना अगर जरूरी हो तो मास्क के साथ-साथ दस्ताने भी पहनें। इससे आप बीमारी से सुरक्षित रह सकते हैं।
  • स्वाइन फ्लू से बचने के लिए भारत में स्वाइन फ्लू वैक्सीन मौजूद है। स्वाइन फ्लू की वैक्सीन एक साल तक इस बीमारी से आपकी रक्षा करती है।
  • स्वाइन फ्लू के लक्षण नज़र आने पर मरीज को तुरन्त अस्पताल में भर्ती करा दें ताकि उसका सही इलाज हो सके।
  • यदि आप इन्फ़्लुएन्ज़ा से पीड़ित हों तो आप अन्य लोगों को संक्रमण से बचाने के लिए उनसे दूर रहें।
  • संक्रमित लोगों के संपर्क में रहने से आप बार-बार इस बीमारी के शिकार हो सकते हैं। 
Thursday, 24 November 2016 07:49

डीहाइड्रेशन यानि निर्जलीकरण। मनुष्य शरीर में पानी के कम हो जाने की अवस्था को डीहाइड्रेशन (Dehydration) कहते हैं। वैज्ञानिक भाषा में डीहाइड्रेशन को हाइपोहाइड्रैशन (Hypohydration) कहते हैं। शरीर में पानी की कमी (Pani ki Kami) के कारण शरीर से खनिज पदार्थ जैसे कि नमक और शक्कर कम हो जाते हैं। डीहाइड्रेशन के दौरान, शरीर की कोशिकाओं से पानी सूखता रहता है जिसके कारण शरीर के कार्य करने का संतुलन असामान्य हो जाता है।

पानी शरीर के लिए बेहद आवश्यक होता है, यह शरीर से विषैले पदार्थ निकालता है, शरीर की त्वचा को स्वस्थ रखता है, पाचन प्रक्रिया में सहायक होता है और शरीर के जोड़ों और आँखों के लिए भी फायदेमंद होता है। शरीर में पानी की कमी के कारण मध्यम या गंभीर समस्या भी उजागर हो सकती है। 

शरीर में पसीने के लगातार आते रहने से शरीर का पानी कम होता रहता है। गर्मियों में डीहाइड्रेशन का खतरा सबसे ज्यादा रहता है। बुखार, उल्टी, दस्त के कारण भी शरीर में डीहाइड्रेशन हो सकता है। डीहाइड्रेशन का शिकार किसी भी उम्र का व्यक्ति हो सकता है और इसका कोई ठोस कारण भी नहीं होती है। बच्चों से लेकर बड़े-बूढ़ों तक में यह शिकायत हो सकती है।

डीहाइड्रेशन के लक्षण

 

डीहाइड्रेशन के कारण (Reasons & Causes of Dehydration)

  • शरीर में पानी की गंभीर समस्या कई बार जानलेवा भी हो सकती है
  • शरीर से पांच प्रतिशत द्रव खत्म होने पर कमज़ोरी, प्यास, उबकाई, चिड़चिड़ापन होता है।
  • शरीर से दस प्रतिशत द्रव खत्म होने पर सिर दर्द, चक्कर और अंगों में सनसनाहट पैदा हो सकती है। शरीर की त्वचा नीली पड़ने लगती है और शरीर कमज़ोर हो जाता है।
  • शरीर से पंद्रह प्रतिशत द्रव खत्म होने पर देखने और सुनने की शक्ति पर असर पड़ता है। जीभ में सूजन हो जाती है और खाना निगलने में दिक्कत होती है।
  • शरीर से पंद्रह प्रतिशत से ज्यादा द्रव खत्म होने पर इंसान की मृत्यु भी हो सकती है।
  • दस्त के कारण शरीर में हुए डीहाइड्रेशन से मनुष्य की मृत्यु के आसार ज्यादा होते हैं। गंभीर डीहाइड्रेशन (Pani ki Kami) की वजह से मनुष्य का ब्रेन डैमेज यानि उसके मस्तिष्क को हानि भी पहुंच सकती है। साथ ही हाइपोवोलेमिक शॉक का खतरा भी रहता है जिसमें शरीर के कई अंगों को हानि पहुंच सकती है।
  • यदि आपको चक्कर आ रहे हैं, या आप किसी भी कार्य को करने में खुद को असमर्थ पा रहे हैं तो ऐसे समय में डॉक्टर को दिखाना बेहद आवश्यक होता है। दो दिन से ज्यादा कब्ज या बुखार रहने पर तुरंत डॉक्टर से सम्पर्क करें।

सामान्य उपचार

 

डीहाइड्रेशन के उपाय (Treatment for Dehydration)

  • जितना हो सके ज्यादा से ज्यादा पानी पिएं।
  • नवजात बच्चों में डीहाइड्रेशन के उपचार (pani ki kami ka ilaj) के लिए बच्चे को मां का दूध व पानी पिलाते रहें। पानी में ओआरएस का घोल मिलाकर पिलाएं।
  • ज्यादा भागदौड़ वाला काम ना करें और जितना हो सके आराम करें।
  • धूप में घर से बाहर ना निकलें और ठंडी जगह पर बैठे रहें।
  • दूध, कॉफी, फ्रूट जूस जैसे पदार्थों का सेवन करने से बचें।
  • इलेक्ट्रोलाइट्स से युक्त स्पोर्ट्स ड्रिंक्स का सेवन अवश्य करें।
Thursday, 24 November 2016 07:37

घमौरियों को अंग्रेजी में प्रिकली हीट (Prickly Heat) कहते हैं। गर्मियों के मौसम में घमौरियां होना आम बात है। गर्मी के मौसम में शरीर से पसीना अधिक मात्रा में बहता है। यदि समय रहते इस पसीने को साफ़ ना किया जाए तो यह शरीर की त्वचा में ही सूख जाता है जिसके कारण पसीने की ग्रंथियां बंद हो जाती हैं और शरीर में घमौरी होने लगती हैं।

 

घमौरियों के विषय में अधिक जानकारी (Details of Prickly Heat in Hindi)

वैज्ञानिक भाषा में घमौरी (Ghamori) को मिलिएरिया रूब्रा कहा जाता है। यह एक प्रकार का चर्मरोग होता है। बरसात के मौसम में भी अधिकतर लोगों को घमौरी की शिकायत होती है। घमौरी व्यक्ति के शरीर पर होने वाली छोटी व लाल फुंसियां और दाने (Heat Rash) हैं जिनमें अक्सर खुजली होती रहती है। कई बार पेट में कब्ज रहने के कारण भी शरीर पर घमौरी उभर सकती हैं।

घमौरी अक्सर छाती, बगल, हाथों और पैरों पर निकलती हैं। यह रोग किसी भी व्यक्ति को लग सकता है। गर्म शहरों में रहने वाले लोग इसका ज्यादा शिकार होते हैं। नवजात शिशुओं में घमौरी (Prickly Heat In Babies) अधिक निकलती है क्योंकि उन्हें पसीना अधिक आता है इसलिए उनमें बहुत सावधानी रखने की जरूरत होती है।

घमौरियां के लक्षण

 

घमौरी के दौरान शरीर में खुजली, हल्की सूजन और चुभन महसूस होने लगती है। घमौरी के दाने धूप के सीधे संपर्क में आने से बढ़ जाते हैं। आमतौर पर घमौरी कुछ दिनों में अपने आप सही हो जाती है लेकिन कुछ लोगों में यह हफ्तों और महीनों तक के लिए हो सकती है। इसलिए एक हफ्ते तक घमौरी के ठीक ना होने पर डॉक्टर से जरूर परामर्श लेना चाहिए। 

घमौरी (Prickly Heat) के कारण लोगों में थकावट (Heat Exhaustion) और धूप में चिड़चिड़ाहट की शिकायत भी होती है। घमौरी के कारण लू लगना का खतरा भी पैदा हो सकता है।

घमौरियां भी कई प्रकार की होती हैं जैसे मिलिएरिया क्रिस्टलाइन (Miliaria Crystallina), मिलिएरिया रूब्रा (Miliaria Rubra) और मिलिएरिया प्रॉफंडा (Miliaria Profunda)। मिलिएरिया प्रॉफुंडा में सबसे अधिक खतरा रहता है और इसे वाइल्डफायर (Wildfire Rash) भी कहते हैं।

सामान्य उपचार

 

घमौरियों से बचाव का सबसे बेहतर उपाय होता है गर्मी से बचकर रहना। इसके अलावा घमौरियों (Ghamoriyan) से बचाव के कुछ अहम उपाय निम्न हैं: 

 

घमौरियों से बचाव (Treatment of Prickly Heat Remedies)

  • सिंथेटिक फैब्रिक से बने वस्त्रों को ना पहनें।
  • सूती और ढीले ढाले कपड़े पहनें।
  • खूब पानी पिएं और नहाएं।
  • बाहर से घर लौटने के कुछ देर बाद स्नान करें।
  • शरीर के हिस्सों को ताज़ा हवा लगने दें।
  • मसालेदार भोजन से बचें। सादा भोजन ही खाएं।
  • बारिश के पानी से स्नान करने से शरीर पर निकली फुंसियां और दानें दूर होते हैं।
  • रोजाना सुबह नीम की चार-पांच पत्तियां चबाएं।
  • शरीर पर मुल्तानी मिट्टी का लेप लगाएं।
  • नीम की पत्तियों को पानी में उबालकर इस पानी से स्नान करें।
  • नारियल के तेल में कपूर मिलाकर इस तेल से पूरे शरीर की मालिश करें।
  • कैलामाइन लोशन का प्रयोग करें।
  • गीले शरीर पर पाऊडर ना लगाएं। जरूरत से ज्यादा पाऊडर का प्रयोग करने से भी बचें।
Thursday, 24 November 2016 07:10

हाई ब्लड प्रेशर या उच्च रक्तचाप की समस्या आजकल बेहद आम होती जा रही है। उच्च रक्तचाप के दौरान मरीज के शरीर में रक्त का प्रवाह बेहद तेज हो जाता है। इस स्थिति में आपके हृदय को अधिक काम करना पड़ता है। आइये जानें इससे जुड़ी अन्य बातें: 

उच्च रक्तचाप (About High Blood Pressure in Hindi)

रक्त द्वारा धमनियों पर पड़ने वाले दबाव को ब्लड प्रेशर कहते हैं। सामान्यतः हमारी धमनियों में बहने वाले रक्त का एक निश्चित दबाव होता है, जब यह दबाव अधिक हो जाता है तो धमनियों पर दबाव बढ़ जाता है और इस स्थति को उच्च रक्तचाप (High Blood Pressure) से जाना जाता है| लगातार उच्च रक्तचाप शरीर को कई तरीके से हानि पहुंचा सकता है। यहाँ तक की हार्ट फेल भी हो सकता है।

 

सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर (Systolic Blood Pressure)

निलयी प्रकुंचन (Ventricular systole) के दौरान रक्त को महाधमनी में धकेलने लिए बायें निलय (Ventricle) के संकुचित होने पर बनने वाला अधिकतम रक्त-चाप सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर कहलाता है।

 

औसत ब्लड प्रेशर (Blood Pressure Range in Normal Condition)

सामान्य स्वस्थ वयस्क का विश्रामावस्था में सिस्टोलिक प्रेशर का परिसर 100 Hg. से 140 मिमी. पारे के बीच रहता है तथा औसतन 120 मिमी पारे के बीच रहता है।

उच्च रक्तचाप के लक्षण

 

 उच्च रक्तचाप के होने में बहुत सारे फैक्टर्स अहम भूमिका निभाते हैं जिनमें से सबसे महत्वपूर्ण है आसीन जीवनशैली। शारीरिक श्रम की कमी के कारण भी कई बार यह बीमारी लोगों को परेशान करती है। उच्च रक्तचाप के कई अन्य कारण निम्न हैं: 

 

उच्च रक्तचाप के कारण (Reason for High Blood Pressure)

  • धूम्रपान
  • मोटापा
  • निष्क्रियता
  • नमक का ज्यादा सेवन
  • शराब पीना
  • तनाव
  • बढ़ती उम्र
  • आनुवंशिकता
  • पारिवारिक इतिहास
  • पुरानी किडनी की बीमारी
  • थाइरोइड डिसऑर्डर 

सामान्य उपचार

रक्तचाप (Blood Pressure) बढ़ने पर किस तरह अपना ध्यान रखना इसकी जानकारी होना बेहद जरूरी है। साथ ही समय-समय पर डॉक्टरी जांच इस बीमारी से बचाने में बहुत कारगर होती है। उच्च रक्तचाप से बचने के कुछ प्रमुख उपाय निम्न हैं: 

उच्च रक्तचाप से कैसे बचें (Treatment of High Blood Pressure in Hindi)

  • प्रतिदिन एक घंटा हल्का या तेज किसी प्रकार का व्यायाम जरूर करें।
  • खाने में हाई फाईबर वाले चीजें लेनी चाहिए। 
  • खुद को एक्टिव रखने का अधिक से अधिक प्रयास करना चाहिए। 
  • समय-समय पर डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। 
Thursday, 24 November 2016 06:59

चिकनगुनिया बुखार (Chikungunya) एक वायरस बुखार है जो एडीज मच्छर एइजिप्टी के काटने के कारण होता है। चिकनगुनिया और डेंगू के लक्षण लगभग एक समान होते हैं। इस बुखार का नाम चिकनगुनिया स्वाहिली भाषा से लिया गया है, जिसका अर्थ है ''ऐसा जो मुड़ जाता है'' और यह रोग से होने वाले जोड़ों के दर्द के लक्षणों के परिणामस्वरूप रोगी के झुके हुए शरीर को देखते हुए प्रचलित हुआ है।

 

चिकनगुनिया के लक्षण (Symptoms of Chikungunya)

चिकनगुनिया में जोड़ों के दर्द के साथ बुखार आता है और त्वचा खुश्क हो जाती है। चिकनगुनिया सीधे मनुष्य से मनुष्य में नहीं फैलता है। यह बुखार एक संक्रमित व्यक्ति को एडीज मच्छर के काटने के बाद स्वस्थ व्यक्ति को काटने से फैलता है। चिकनगुनिया से पीड़ित गर्भवती महिला को अपने बच्चे को रोग देने का जोखिम होता है।

चिकनगुनिया के लक्षण

 

चिकगुनिया के कारण (Causes of Chikungunya in Hindi)

चिकनगुनिया मुख्य रूप से मच्छरों के काटने के कारण ही होता है। इसके सामान्य कारण निम्न हैं: 

  • मच्छरों का पनपना।  
  • रहने के स्थान के आसपास गंदगी होना। 
  • पानी का जमाव। 

सामान्य उपचार

 

चिकनगुनिया होने पर डॉक्टर की सलाह लेना सबसे जरूरी है। साथ ही चिकनगुनिया से पीड़ित रोगी को निम्न उपाय अपनाने चाहिए: 

चिकनगुनिया का प्राथमिक उपचार (Treatment of Chikungunya in Hindi)

  • अधिक से अधिक पानी पीएं, हो सके तो गुनगुना पानी पीएं।
  • ज्यादा से ज्यादा आराम करें।
  • चिकनगुनिया के दौरान जोड़ों में बहुत दर्द होता है जिसके लिए डाॅक्टर की सलाह पर ही दर्द निवारक (Pain Killer) लें।
  • दूध से बने उत्पाद, दूध-दही या अन्य चीजों का सेवन करें।
  • रोगी को नीम के पत्तों को पीस कर उसका रस निकालकर दें।
  • रोगी के कपड़ों एवं उसके बिस्तर की साफ-सफाई पर खास ध्यान दें।
  • करेला व पपीता और गिलोय के पत्तों का रस काफी फायदेमंद माना जाता है। 
  • नारियल पानी पीने से शरीर में होने वाली पानी की कमी दूर होती है और लीवर को आराम मिलता है। 
  • ऐस्प्रिन बुखार होने पर कभी ना लें, इससे काफी समस्या हो सकती है। 

 

चिकनगुनिया में बच्चों की देखभाल (Chikungunya in Children)

  • बच्चों का खास ख्याल रखें। 
  • बच्चे नाजुक होते हैं और उनका इम्यून सिस्टम कमजोर होता है इसलिए बीमारी उन्हें जल्दी पकड़ लेती है। ऐसे में उनकी बीमारी को नजरअंदाज न करें।
  • बच्चे खुले में ज्यादा रहते हैं इसलिए इन्फेक्शन होने और मच्छरों से काटे जाने का खतरा उनमें ज्यादा होता है।
  • बच्चों घर से बाहर पूरे कपड़े पहनाकर भेजें। मच्छरों के मौसम में बच्चों को निकर व टी - शर्ट न पहनाएं। रात में मच्छर भगाने की क्रीम लगाएं।
  • अगर बच्चा बहुत ज्यादा रो रहा हो, लगातार सोए जा रहा हो, बेचैन हो, उसे तेज बुखार हो, शरीर पर रैशेज हों, उलटी हो या इनमें से कोई भी लक्षण हो तो फौरन डॉक्टर को दिखाएं।
  • आमतौर पर छोटे बच्चों को बुखार होने पर उनके हाथ - पांव तो ठंडे रहते हैं लेकिन माथा और पेट गर्म रहते हैं इसलिए उनके पेट को छूकर और रेक्टल टेम्प्रेचर लेकर उनका बुखार चेक किया जाता है। बगल से तापमान लेना सही तरीका नहीं है, खासकर बच्चों में। अगर बगल से तापमान लेना ही है तो जो रीडिंग आए, उसमें 1 डिग्री जोड़ दें। उसे ही सही रीडिंग माना जाएगा।
Thursday, 24 November 2016 06:42

सीने में दर्द ( Chest Pain) की बात आते ही हम दिल के दौरे (Heart Attack) की बात सोचने लगते हैं, मगर सीने में दर्द कई कारणों से हो सकता है। फेफड़े, मांसपेशियाँ, पसली, या नसों में भी कोई समस्या उत्पन्न होने पर सीने में दर्द होता है। किसी-किसी परिस्थिति में यह दर्द भयानक रूप धारण कर लेता है जो मृत्यु तक का कारण बन जाता है। लेकिन एक बात ध्यान में रखें कि खुद ही रोग की पहचान न करें और सीने में दर्द को नजरअंदाज न करें, तुरन्त चिकित्सक के पास जायें।

सीने में दर्द के लक्षण

 

एनजाइना (Angina) : हृदय (Heart) के कारण जब सीने में दर्द होता है तब चिकित्सा शास्त्र के अनुसार इसको एनजाइना कहते हैं। एनजाइना से ग्रस्त रोगी को सीने में दर्द कुछ ही देर तक होता है या परिस्थिति बिगड़ जाने पर दर्द की अवधि बढ़ जाती है। साधारणतः यह दर्द कंधे, बाँह, पीठ, पेट के ऊपरी भाग में होता है। एनजाइना में धमनियों के सिकुड़ जाने के कारण रक्त का हृदय में आवागमन बाधित हो जाता है। जब धमनियों में रक्त का थक्का जमने लगता है तब साँस लेने में मुश्किल होने लगती है और सीने में दर्द शुरू हो जाता है। अगर परिस्थिति को संभाला नहीं गया तो मृत्यु तक हो सकती है। एनजाइना का दर्द साधारणतः आनुवंशिकता के कारण, मधुमेह, हाई कोलेस्ट्रॉल, पहले से हृदय संबंधित रोग से ग्रस्त होने के कारण होता है।

उच्च रक्तचाप: जो धमनियाँ रक्त को फेफड़ों तक ले जाती है उसमें जब रक्त का चाप बढ़ जाता है तब सीने में दर्द होता है और इस अवस्था को उच्च रक्तचाप (Pulmonary Hypertension) कहते हैं।

एसिडिटी (Acidity): यह साधारणत गैस्ट्रो इसोफेगल रिफ्ल्क्स डिज़ीज़ (गर्ड) (भाटा रोग) के कारण होता है।

फेफड़ों में रोग (Lung Disease) : जब रक्त धमनियों में थक्का जमने लगता है तब फेफड़ों के टिशु या ऊतकों में रक्त का प्रवाह रुकने लगता है, ऐसा होने से बेचैनी होने लगती है और साँस लेने में मुश्किल होता है, जो बाद में दर्द का कारण बनता है।

डर के कारण (Fear Psycosis): कभी-कभी दिल में दर्द अत्यधिक डर, अचानक कोई सदमा, दिल की धड़कन के बढ़ने, अत्यधिक पसीना और साँस में तकलीफ के कारण भी होता है।

तनाव: तनाव के कारण दिल की धड़कन तेज हो जाती है, साँस लेने में तकलीफ होने लगती है और रक्त चाप बढ़ जाने के कारण भी हृदय में रक्त संचार की गति को नुकसान पहुँचता है, इन सब कारणों से भी सीने में दर्द होता है।

सामान्य उपचार

  • सीने में दर्द (Chest Pain) का सीधा संबंध हमारे अनियोजित और अस्वस्थ खान-पान से है। खान पान में सुधार के साथ साथ हमें नियमित रूप से व्यायाम करना चाहिए।
  • जो व्यायाम शरीर के लिए उपयुक्त हो उस व्यायाम को जरूर करें, जैसे- तेज कदमों से चलना, सीढ़ियाँ चढ़ना, बैडमिंटन या टेनिस खेलना आदि।
  • आहार में फाइबर की मात्रा को बढ़ाएं और कैलोरी की मात्रा को कम करें।
  • खाने में नमक की मात्रा को कम करें और अगर हो सके तो बिलकुल छोड़ दें।
  • धूम्रपान हृदय संबंधी बीमारी को बढ़ाने में अहम् भूमिका निभाता है। अतः इसको छोड़ना फायदेमंद है।

 

Wednesday, 23 November 2016 10:28

थकान एक सामान्य अवस्था है, अधिक शारीरिक या मानसिक परिश्रम करने से शरीर में थकान आ जाती है और शरीर सुस्त हो जाता है। थकान, कमजोरी से अलग है। आराम करने पर थकान चली जाती है जबकि कमजोरी बनी रह सकती है।

 

क्या है थकान (About Fatigue in Hindi)
थकान की वजह सिर्फ कमजोरी हो ऐसा जरूरी नहीं है। हमेशा होने वाली थकान (Thakan) गलत जीवनशैली से लेकर कई रोगों का संकेत हो सकती है।

अगर आप पूरे दिन थकान महसूस करते हैं, तो इसे नजरअंदाज न करें। इसका बुनियादी अर्थ है कि शारीरिक या मानसिक स्तर पर कहीं कुछ ठीक नहीं है।

थकान के लक्षण

 

अधिक शारीरिक परीश्रम करने पर तो थकान हो सकती है लेकिन अगर थकान लगातार हो तो यह एक गंभीर मुद्दा हो सकता है। जानिएं किन हालातों में अधिक थकान होती है। 

थकान के कारण (Causes of Fatigue in Hindi)

  • शारीरिक स्तर पर इसके कई कारण हो सकते हैं जैसे एनीमिया, थाइराइड, शुगर और कोलेस्ट्रॉल का बड़ा हुआ स्तर।
  • शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं (Red Blood Cell) की कमी से एनीमिया की दिक्कत होती है, जिसका एक प्रमुख लक्षण है थकान। आजकल महिलाओं में यह समस्या अधिक पाई जाती है जिससे बचाव के लिए आयरन (Iron) से भरपूर डाइट फायदेमंद होती है।
  • हाइपोथायराइड और मधुमेह (Diabetes) की स्थिति में शरीर में मेटाबॉलिज्म (Metabolism) सही तरीके से काम नहीं करता जिसके कारण कोशिकाओं को पर्याप्त भोजन नहीं मिलता है, इसलिए शरीर की ऊर्जा तेजी से खत्म हो जाती है और आप जल्दी थक जाते हैं।
  • यह हल्के बुखार की वजह से भी हो सकता है जो इंफेक्शन का नतीजा होता है।
  • बहुत ज्यादा शुगर या रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट्स जैसे चावल, मैदा आदि खाना, लम्बे अंतराल पर खाना खाना और सही तरह का भोजन न खाने से भी आदमी थकान महसूस करता है।
  • मानसिक स्तर पर होने वाली थकान का अर्थ है कि आप तनावग्रस्त हैं।
  • अवसाद (Depression) की स्थिति में भी बहुत अधिक थकान, सिरदर्द और कमजोरी महसूस होती है। अवसाद की वजह से थकावट होना आज की जीवनशैली में बहुत सामान्य है।
  • अगर आप दो-तीन हफ्तों तक हर समय थकान महसूस करते हैं तो मनोचिकित्सक से परामर्श उचित होगा।
  • दिन में कई बार चाय-कॉफी का सेवन करने वाले लोगों को थकान जल्दी होती है। कैफीन वाली चीजों के अधिक सेवन से ब्लड प्रेशर और धड़कन की गति तेज होती है जिससे थकान जल्दी होती है।
  • गर्मियों में शरीर में पानी की कमी यानि डिहाइड्रेशन भी आपको जल्दी थका सकती है। इसलिए शरीर में पानी की कमी न होने दें।
  • आजकल कंपनियों में रात की शिफ्ट या अलग-अलग शिफ्ट में काम करने का चलन बढ़ गया है। कई बार इससे बॉडी क्लॉक पर विपरीत प्रभाव पड़ता है और हर समय थकावट महसूस होती है। इससे बचाव के लिए दिन में सोने का एक नियत समय तय करें जिससे आपका शरीर अभ्यस्त हो सके और सोकर उठने के बाद आप तरोताजा महसूस करें।
  • खान-पान और अपनी जीवनशैली पर ध्यान देने की खास जरूरत है। जरूरी नहीं कि हर बार थकान का कारण कोई शारीरिक समस्या हो, कई बार थकान का कारण मानसिक भी होता है।

सामान्य उपचार

 

थकान दूर भगाने का सबसे बेहतर उपाय होता है आराम करना। इसके साथ कुछ अन्य उपाय अपना कर भी आप थकान को दूर भगा सकते हैं। यह उपाय निम्न हैं: 

 

थकान को कैसे भगाएं दूर (Treatment of Fatigue in Hindi)

  • रात में अच्छी व भरपूर नींद लेना, थकान को दूर करने का सबसे अच्छा तरीका है। 7-8 घंटे की नींद जरूर लें ताकि अगले दिन के लिए आपको पर्याप्त ऊर्जा मिले।
  • जब भी थकान महसूस हो तो 15-20 मिनट की झपकी जरूर लें। नींद पूरी न होने से वजन भी बढ़ता है और थकान भी जल्दी होती है। 
  • थकान अधिक होने पर हाथ पांव ढीले छोड़कर, आंखें बंद कर पलंग पर लेट जाइए। ऐसे में मांसपेशियों का तनाव दूर होता है।
  • हँसी वास्तव में सबसे अच्छी दवा है। पुराने दोस्तों से मुलाकात करें, हास्य फिल्में देखें...कोई भी चीज़- जिससे आप खुलकर हँस सकें। जिन लोगों को प्यार करते हैं उनके साथ वक्त गुजारें।
  • मन को अच्छा लगने वाला संगीत सुनें, इससे तनाव दूर होता है।
  • दिन भर थोड़ा-थोड़ा पानी या कोई भी तरल पदार्थ पीते रहें। पानी शरीर से हानिकारक तत्वों को बाहर निकालकर शारीरिक प्रणाली में नई ऊर्जा भरता है। शर्बत, फलों का रस, छाछ व नारियल पानी आदि पीना चाहिए।  
  • दिन भर के सतत ऊर्जा प्रवाह के लिए बहुत सारी हरी सब्जियाँ खायें। खाने में फल, नट्स, अंडा और फिश भी शामिल करें। 
  • ज्यादा कॉफी और चाय न पियें, भले ही आपको उनसे राहत मिलती है। यह सिर्फ अस्थायी राहत होती है। 
  • सक्रिय रहें, आलस छोड़ें।
  • नियमित कसरत करें। 

थकावट के लिए घरेलू नुस्ख़े (Home Remedies For Fatigue)

थकावट-आलस्य से आप जिंदगी से निराश महसूस करते हैं। हमेशा गुस्से में हारे हुए इंसान की तरह व्यवहार करते है। आप भी चाहते हैं कि एक अच्छे नस्ल के घोड़े की तरह रेस लगाएं, लेकिन आपको महसूस होता है कि आपके पांव कीचड़ में  फंसे हुए हैं। आप इच्छाशक्ति भी करते हैं लेकिन वो काम नहीं करता। मानसिक और शारीरिक थकावट वैसे तो सामान्य बीमारी है , मगर कुछ गंभीर बीमारी में भी ऐसे लक्षण दिखाई पड़ते हैं।

थकावट कई कारणों से होती है। मुख्य तौर पर खराब जीवनशैली, नींद में कमी, कुपोषण, फ्लू, मोटापा, एलर्जी, एनीमिया, अल्कोहल का सेवन, थायराइड, हार्ट की बीमारी समेत कैंसर, डायबिटीज और एडस जैसी गंभीर बीमारी में भी थकावट का अनुभव होता है।

थकावट का कोई खास चिकित्सकीय इलाज नहीं है बस आपको अपने जीवनशैली में थोड़ा बदलाव लाना होगा। खाने की आदत, पीने की आदत में बदलाव के साथ व्यायाम-योग और ध्यान को अपने जीवन का हिस्सा बनाना होगा। हमेशा सकारात्मक सोचना होगा।

थकावट को भगाने के क्विक घरेलू इलाज (Quick Home remedies for fatigue)

पिपरमिंट तेल के कुछ बूंदों को टिसू पेपर या रुमाल पर डालकर नाक के पास रखें और तेज सांस ले। काफी तरोताजा महसूस करेंगे। अगर आपके पास थोड़ा समय है तो नहाने के टब में कुछ बुंदे पिपरमिंट तेल के और कुछ बूंदे मेंहदी के तेल के डाल कर स्नान करें। काफी स्फूर्ति मिलेगी।

सुबह-शाम नियमित योग करें। खासकर पीठ के बल लेट कर पैर को सिर से उंचा करना और फिर उसे धीरे-धीरे नीचे करना। घुटनों को नाक में सटाना। ये कुछ ऐसे व्यायाम हैं जिससे आप तरोताजा महसूस करते हैं। योग में भ्रामरी भी काफी फायदेमंद रहता है।

सुबह बेहतर और पोषण से भरा नाश्ता करें और दिन भर में हल्का भोजन और शाम को हेल्दी स्नैक्स लेते रहें।  यह दिन में दो टाइम भरपेट और भारी भोजन खाने से ज्यादा बेहतर है। प्रयास करें कि आप अपने भोजन के साइज को 300 कैलोरी पर लिमिट कर इसका रुटीन बना लें। इससे आपका ब्लड शुगर भी कंट्रोल में रहेगा और थकावट भी नहीं होगी।

भोजन में हमेशा हाइ-फाइबर वाले फूड्स ही खाएं। क्योंकि इसमें कंपलेक्स कार्बोहाइड्रेट की मात्रा ज्यादा पाई जाती है। जैसे कि समूचे-साबुत अनाज चावल और साबूत गेंहू की रोटी, दाल- दलिया और सब्जी-सलाद। इससे ब्लड शुगर भी कंट्रोल में रहता है और थकावट नहीं होती है।
अधिक वसा वाले भोजन खाना कम करें। इससे मोटापा बढ़ती है और शरीर में हमेशा थकावट महसूस होती है।

बिना छीले हुए आलू के स्लाइस काट कर इसे रात भर पानी में भींगने छोड़ दें। सुबह इस जूस को पी लें। इसमें काफी मात्रा में पोटाशियम रहती है जो शरीर में मिनरल्स की कमी को दूर करती है। मिनरल्स के सेवन से शरीर की मांसपेशिया काफी सक्रिय रहती है और आप थकावट नहीं महसूस करते हैं।

दिन में एक बार पालक खाना थकावट को भगाने की सबसे पुराना घरेलू भलाज है। पालक में पोटाशियम के साथ आइरन और विटामिन बी ग्रुप के कई विटामिन पाए जाते हैं, जो शरीर को उर्जा और स्फूर्ति देती है।

चैन की नींद सेहत के लिए सबसे जरुरी है। मानसिक और शारीरिक थकावट की सबसे बड़ी वजह नींद में कमी ही है। कम से कम एक एक मनुष्य को आठ घंटा बेहतर स्वास्थ्य के लिए सोना चाहिए। नींद में कमी है या गड़बड़ी है तो ध्यान-योग करें और हमेशा सकारात्मक सोचें। योग में एक आसन है- शवासन, उसे आजमाएं। काफी फायदा होगा।

सप्लीमेंट के तौर पर मानसिक औऱ शारीरिक थकावट को भगाने के लिए गिनसेंग, मैग्नीशियम और गिन्कगो भी ले सकते हैं।

थकावट से लड़ने के लिए 10 टॉप फूड्स (10 Top Foods to fight fatigue)

  • केला
  • ग्रीन टी
  • सीताफल के बीज
  • ओटमील
  • योगर्ट
  • तरबूज
  • अखरोट
  • लाल शिमला मिर्च
  • हरी बींस
  • पालक
Wednesday, 23 November 2016 10:23

घुटना शरीर का सबसे बड़ा तथा जटिल जोड़ है। यह एक सायनोवियल जोड़ (Sinovial Joint) का उदाहरण हैं। इस जोड़ में मुख्यत चार हड्डियों, लगभग 15 मांसपेशियों के अलावा एक और महत्त्वपूर्ण चीज़ होती है जिसे कारटीलेज (Cartilage) कहते हैं। 

दैनिक जीवन में चलने-फिरने, चढ़ाव चढ़ने, सैर करने, व्यायाम करने, व्यायाम करने से घुटनों के जोड़ों में स्थित कारटीलेज का क्षय होता है|
कारटीलेज में द्रव या कोलोजन, रक्त प्रवाह के अभाव में कठोर होने लगता है।

 

घुटनों का दर्द (About Knee Pain in Hindi)

यह रोग पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में ज्यादा पाया जाता है। इसका कारण है महिलाओं में माहवारी बन्द होने पश्चात् स्त्री हारमोन ‘इस्ट्रोजन’ का स्राव काफी कम हो जाता है, जिससे शरीर का वजन बढ़ने व आस्टियोपोरोसिस व कार्टिलेज क्षरण की प्रक्रिया तेज हो जाती है।

घुटने का दर्द अस्थिरज्जु (Ligament) के फटने से भी होता है। हमारी रोजमर्रा की गतिविधियां जैसे चलना, दौड़ना, उछलना या सीढ़ियां चढ़ने से घुटने (Ghutne ka Dard) पर बहुत ज्यादा दबाव पड़ता है। हर दिन के दबाव से घुटने की अस्थिरज्जु में टूट-फूट हो जाती है, जिससे भी जोड़ों का दर्द  होता है।

आमतौर पर देखा जाता है कि घुटने के हर दर्द को लोग आर्थराइटिस समझ लेते हैं, जबकि घुटनों में दर्द के कई कारण हो सकते हैं तथा उनका इलाज भी भिन्न-भिन्न है।

अर्थराइटिस एक ऐसी बीमारी है, जिसका शरीर के जोड़ों और मांसपेशियों पर असर पड़ता है। मरीज के पैरों और हड्डियों के जोड़ों में तेज दर्द होता है, जिससे चलने-फिरने में भी तकलीफ हो सकती है। कुछ खास तरह के अर्थराइटिस में शरीर के दूसरे अंग भी प्रभावित होते हैं। ऐसे में दर्द के साथ दूसरी समस्याएं भी हो सकती हैं।

घुटनों का दर्द के लक्षण

 

बढ़ती उम्र और मोटापे के कारण अकसर घुटनों के दर्द से दो-चार होना पड़ता है। घुटनों के दर्द के कुछ अन्य कारण (Causes of Knee Pain in Hindi) निम्न हैं: 

  • अर्थराइटिस- रीयूमेटाइड, आस्टियोअर्थराइटिस और गाउट सहित अथवा संबंधित ऊतक विकार
  • बरसाइटिस- घुटने पर बार-बार दबाव से सूजन (जैसे लंबे समय के लिए घुटने के बल बैठना, घुटने का अधिक उपयोग करना अथवा घुटने में चोट)
  • टेन्टीनाइटिस- आपके घुटने में सामने की ओर दर्द जो सीढ़ियों अथवा चढ़ाव पर चढ़ते और उतरते समय बढ़ जाता है। यह धावकों, स्कॉयर और साइकिल चलाने वालों को होता है।
  • बेकर्स सिस्ट- घुटने के पीछे पानी से भरा सूजन जिसके साथ अर्थराइटिस जैसे अन्य कारणों से सूजन भी हो सकती है। यदि सिस्ट फट जाती है तो आपके घुटने के पीछे का दर्द नीचे आपकी पिंडली तक जा सकता है।
  • घिसा हुआ कारटिलेज घुटने के जोड़ के अंदर की ओर अथवा बाहर की ओर दर्द पैदा कर सकता है। 
  • घिसा हुआ लिगामेंट (ए सी एल टियर)- घुटने में दर्द और अस्थायित्व उत्पन्न कर सकता है।
  • नीकैप (Knee Cap) का विस्थापन। 
  • झटका लगना अथवा मोच- अचानक अथवा अप्राकृतिक ढंग से मुड़ जाने के कारण लिगामेंट में मामूली चोट। 
  • जोड़ में संक्रमण (इंफेक्शन)। 
  • घुटने की चोट- आपके घुटने में रक्त स्राव हो सकता है जिससे दर्द अधिक होता है |
  • श्रोणि विकार (Pelvic Disorder)- यह दर्द उत्पन्न कर सकता है जो घुटने में महसूस होता है। उदाहरण के लिए इलियोटिबियल बैंड सिंड्रोम एक ऐसी चोट है जो आपके श्रोणि से आपके घुटने के बाहर तक जाती है।
  • मोटापा, जिसके कारण घुटनों पर अधिक बोझ पड़ता है, जिससे घुटने का कार्टिलेज घिस जाता है। हड्डी के सिरों पर पड़ने वाला अधिक दबाव इस दर्द को और अधिक बढ़ा देता है।

सामान्य उपचार

घुटनों के दर्द से निजात पाने का सबसे बेहतर उपाय इससे बचना माना जाता है। डॉक्टरों के अनुसार स्वस्थ जीवनशैली और वजन को नियंत्रण में रखकर इस बीमारी से आसानी से बचा जा सकता है। घुटनों के दर्द से बचाव के कुछ अन्य उपाय निम्न हैं: 

घुटनों के दर्द के उपाय (Treatment and Remedies of Knee Pain in Hindi)

  • अपना वजन नियंत्रित रखें। 
  • स्विमिंग करना सबसे फायदेमंद है। 
  • दौड़ने से ज्यादा चलना अच्छा रहता है। 
  • जांघ की मांसपेशियों से संबंधित व्यायाम करें।
  • फल व सब्जियों का भरपूर सेवन करें। इनमें एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में होते हैं। 
  • घुटनों को मोड़कर नहीं बैठना चाहिए।  पेट को साफ रखें तथा कब्ज न होने दें। 
  • घुटनों के नीचे अथवा बीच में एक तकिया रखकर सोएं।
  • दिन में कम से कम 2 बार बर्फ लगाएं।
  • डॉक्टर से समय-समय पर जांच कराते रहें। 

घुटने के दर्द के लिए घरेलू उपचार (Home Remedies For Knee Pain)

घुटनों के दर्द की सबसे बड़ी वजह है ओवरवेट होना। अगर आपके शरीर का वजन ज्यादा है तो जाहिर है आपका भार सहने में आपके घुटनों को तकलीफ होगी। इसके अलावा फिजिकल एक्टिविटी कम होने, कैल्शियम की कमी होने या अर्थराइटिस (arthritis) होने से भी घुटनों में दर्द रहता है। मांसपेशियों में तनाव रहने या किसी चोट की वजह से भी घुटनों का दर्द आपको परेशान कर सकता है। 
आइए जानें कुछ घरेलू उपाय, जिन्हें अपनाकर आप घुटनों के दर्द से राहत पा सकते हैं।

1. ठंडा सेक (Cold fomentation)
घुटनों के दर्द से राहत के लिए ठंडा सेक दिया जा सकता है। यह सबसे आसान और प्रभावी तरीकों में से एक है। घुटनों को ठंडा सेक देने से यह रक्त वाहिकाओं को कसता है जिससे रक्त प्रवाह कम होता है और सूजन भी घटती है। 

कैसे करें-
एक पतली तौलिया में बर्फ के टुकड़े लपेट लें। 10 से 20 मिनट के लिए दर्द प्रभावित घुटने के हिस्से को सेकें। आपका दर्द धीरे धीरे दूर हो जाएगा। इस उपाय को रोजाना दो या तीन बार कर सकते हैं।

2. सेब का सिरका (Apple cider vinegar)
सेब का सिरका भी घुटने के दर्द को कम करने में सहायक है। ये घुटने के जोड़ के भीतर खनिज इकठ्ठा करता है और हानिकारक विषाक्त पदार्थों को नष्ट करता है।

कैसे करें- 
दो कप फ़िल्टर्ड पानी में दो चम्मच सेब का सिरका मिलाएं। दिनभर में यह घोल पीएं। पूरी तरह ठीक होने तक रोजाना इस टॉनिक का सेवन करें।

बाल्टी में गर्म पानी डालकर उसमें दो कप सेब का सिरका मिलाकर 30 मिनट के लिए पानी में प्रभावित घुटने भिगाकर बैठ जाएं। इससे घुटनों के दर्द में काफी राहत मिलेगी।

एक चम्मच सेब का सिरका और जैतून के तेल को बराबर भागों में मिलाकर घुटनों की मालिश करें, फायदा होगा।

3. लाल मिर्च (Red Chilli)
लाल मिर्च के इस्तेमाल से घुटनों के दर्द में भी राहत मिलती है, इसमें मौजूद केपसाइसिन दर्द निवारक की तरह काम करता है।

कैसे करें- 
एक से डेढ़ कप तेल में दो बड़े चम्मच लाल मिर्च पाउडर डालकर एक पेस्ट तैयार करें। कम से कम एक सप्ताह तक हर दिन दो बार यह पेस्ट घुटनों पर लगाएं। घुटनों के दर्द से राहत मिलेगी।

एक कप सेब के सिरके में एक चौथाई या आधा चम्मच लाल मिर्च पाउडर डालकर मित्रण तैयार करें। इस मित्रण को घुटनों पर लगाने से दर्द और सूजन कम हो जाती है। जब तक घुटनों दर्द से राहत न हो तब तक हर दिन इस पेस्ट को 20 मिनट के लिए घुटनों पर लगा सकते हैं। 

4. अदरक (Ginger)

घुटने का दर्द मांसपेशियों में तनाव की वजह से हो या गठिया के कारण, अदरक दोनों ही स्थिति में बेहद लाभप्रद है। इसमें एंटी़फ्लेमेबल गुण होते हैं जो घुटने की सूजन और दर्द को कम कर देते हैं।

कैसे करें-
एक कप पानी में थोड़ा सा अदरक का टुकड़ा लेकर 10 मिनट उबाल लें। इसके बाद इसको ठंडा करके इसमें थोड़ा सा नींबू का रस और शहद मिलाएं। इस घोल को रोज पीएं। आप चाहें तो अदरक के तेल से घुटनों की मालिश भी कर सकते हैं। 

5. हल्दी (Haldi)
हल्दी घुटने के दर्द को दूर करने के लिए एक प्रभावी और प्राकृतिक उपचार है। हल्दी में मौजूद कुरक्यूमिन एंटीऑक्सीडेंट की तरह काम करता है और दर्द कम करने में मदद करता है।

कैसे करें-
एक कप पानी में अदरक और हल्दी को थोड़ा थोड़ा मिलाकर 10 मिनट के लिए इसे उबाल लें। इसके बाद इसको गुनगुना होने के बाद शहद मिलाएं। दिन में दो बार इसे पीएं।
एक गिलास दूध में हल्दी डालकर उबालें और उसमें शहद मिलाकर पीएं। इससे भी घुटनों का दर्द ठीक होता है।

नोट: 
* हल्दी रक्त को पतला करती है, ऐसे में खून पतला (Blood Thinning) करने की दवा लेने वालों के लिए यह ठीक नहीं।
* शहद को बहुत गरम पानी या दूध में नहीं मिलाना चाहिए।

6. नींबू (Lemon)
नींबू भी गठिया की वजह से घुटने के दर्द के लिए एक घरेलू लाभकारी उपाय है। नींबू में पाया जाने वाला साइट्रिक एसिड (citric acid) गठिया में यूरिक एसिड क्रिस्टल को घुलाता है।

कैसे करें-
एक नींबू छोटे-छोटे टुकड़ों में काटें। इन टुकड़ों को सूती कपड़े में डालकर गर्म तिल के तेल में डुबाएं। इसके बाद पांच से 10 मिनट के लिए प्रभावित घुटने पर कपड़ा रखें। एक दिन में दो बार ऐसा करने से दर्द पूरी तरह चला जाता है।
एक गिलास पानी में नींबू निचाड़कर पीने से भी लाभ होता है।

Wednesday, 23 November 2016 10:07

किसी बात से परेशान, आहत या दुखी होकर, व्यक्ति का मन से गहन उदास होना ही तनाव है। तनाव मन से संबंधित है। तनाव (Stress) एक तरह का द्वंद है जो संतुलन और सामंजस्य न बैठा पाने के कारण होता है। जो व्यक्ति तनाव से ग्रसित होता है उसका मन अशांत हो जाता है, भावनाएं स्थिर नहीं रह पातीं। सही और गलत का फैसला करना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में संबंधित व्यक्ति की शारीरिक और मानसिक दोनों ही स्थितियां दिन-प्रतिदिन खराब होती जाती हैं।

 

तनाव से होने वाली समस्याएं (Issue from Stress)

कभी तनाव (Tanav) लेने से व्यक्ति में किसी भी कार्य को बेहतर करने की लगन पैदा हो जाती है लेकिन स्थिति तब बिगड़ती है जब यह तनाव हावी होने लगता है। जब कोई भी व्यक्ति तनाव लेता है तो उसे कई प्रकार की समस्याओं से परेशान होना पड़ सकता है जैसे:

  • उसका रक्तचाप बढ़ जाता है।
  • सांसे सामान्य से तेज चलती हैं।
  • पाचन शक्ति प्रभावित होती है।
  • रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित होती है।
  • मांसपेशियां भी तनाव लेने लगती हैं।

तनाव- स्ट्रैस के लक्षण

 

तनाव के कारण (Cause of stress)

जब कोई व्यक्ति खुद पर दबाव महसूस करता है तब व्यक्ति के शरीर से कुछ खास केमिकल निकलते हैं जो शरीर को ज्यादा ऊर्जा और ताकत देते हैं जिससे आप खुद को सहज महसूस कर सकें। जब खुद को असहज या डरा हुआ महसूस करते हैं तब यह केमिकल उल्टा असर दिखाने लगते हैं। तनाव परिस्थिति पर निर्भर करता है, कोई व्यक्ति साधारण बात पर भी तनाव ले लेता है जबकि कोई व्यक्ति बिल्कुल भी तनाव नहीं लेता। कोई बड़ी- बड़ी बात भी नहीं सोचता जबकि कोई कई छोटी-छोटी बातों को एक साथ सोचता रहता है।

सामान्य बाहरी कारण (Common External Reasons)

- जीवन में कोई बड़ा नकारात्मक बदलाव
- स्कूल या कॉलेज में किसी भी तरह का कोई दबाव
- रिश्तों में दरार
- आर्थिक तंगी
- काम का ज्यादा बोझ
- बच्चे और परिवार की स्थिति ठीक न होना

 

सामान्य कारण (Common Reasons of Stress)

- बहुत दूर का सोचते रहना
- खुद से नकारात्मक बातें करते रहना
- खुद में कमी ढूंढते रहना
- खुद में आत्मविश्वास की कमी होना

सामान्य उपचार

तनाव दूर करने के टिप्स (Tips to Prevent Stress)

- किसी भी प्रकार का नशा न करें।
- भरपूर नींद और आराम जरूर करें।
- खुद के ऊपर दबाव महसूस न करें।
- मन को व्यवस्थित तथा मजबूत करने के लिए पुस्तकें ज्यादा पढ़ें।
- दूसरों को भी सुनना सीखें।
- गुस्से पर काबू रखें।
- कुछ समय निकालकर अपनी पसंद की चीजें भी करें।
- अपने अंदर के बच्चे को मरने न दें। कभी कभी बच्चों की तरह खेलना भी जरूरी है।

तनाव से बचाव के लिए घरेलू नुस्खे (Home Remedies For Stress)

भागदौड़ भरी दिनचर्या में अधिकांश लोग, तनाव (Stress) से ग्रसित हैं। तनाव से न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक स्थिति भी प्रभावित होती है। इतना ही नहीं तनाव के कारण व्यक्ति के व्यवहार में भी परिवर्तन होते रहते हैं जिससे संबंधित व्यक्ति के साथ उससे जुड़े अन्य लोग भी प्रभावित होते हैं। तनाव से व्यक्ति की याददाश्त, सीखने की क्षमता (Learning ability), तथा कार्य करने की क्षमता (Working ability) भी प्रभावित होती है।

 

आइए आपको बताते हैं तनाव से बचाव के लिए घरेलू नुस्खे (Home Remedies for Stress):

1. ग्रीन टी (Green tea)- ग्रीन टी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट (Anti Oxidents) शरीर तथा दिमाग को शांत करते हैं तथा मूड में सकारात्मक बदलाव लाते हैं। ग्रीन टी में मौजूद थियानीन (Theanine) सतर्कता और ध्यान बढ़ाता है। यदि किसी को ग्रीन टी पसंद न हो तो ब्लैक टी भी पी जा सकती है।

2. संतरा (Orange)- संतरा में विटामिन सी उच्च मात्रा में पाया जाता है जो कि इम्यूनिटी (immunity) को बढ़ाने में सहायक है। संतरे में विटामिन ए और बी के साथ अन्य स्वास्थ्य वर्धक मिनरल भी पाये जाते हैं। तनाव से राहत के लिए रोजाना संतरे का एक गिलास ताजा जूस पीएं।

3. दूध (Milk)- एक गिलास दूध शरीर को भरपूर एंटीऑक्सीडेंट और जरूरी पोषक तत्व देता है। यह सभी पोषक तत्व व्यक्ति को तनाव से लड़ने की शक्ति देते हैं और चित्त को शांत रखते हैं। रोजाना सुबह नाश्ते में तथा रात को सोने से पहले एक गिलास गरम दूध पीना तनाव से राहत देता है।

4. बादाम (Almond)- बादाम में विटामिन बी, ई, मैग्नीशियम, जिंक, सेलेनियम (selenium) तथा अन्य स्वास्थ्य वर्धक वसा पाई जाती है। जिस कारण यह तनाव से राहत देते हैं। बादाम को भून कर या कच्चा भी खाया जा सकता है। यदि ऐसे खाना संभव न हो तो बादाम का पाउडर बनाकर, दूध के साथ खाया जा सकता है।

5. पालक (Spinach)- पालक में भरपूर मात्रा में विटामिन ए, बी और सी से भरपूर होती हैं। इनमें मिनरल (minerals) भी प्रचुर मात्रा में पाये जाते हैं जो तनाव से लड़ने की शक्ति देते हैं। एक कप पालक रोजाना खाने से शरीर और दिमाग दोनों को राहत मिलती है। पालक का सूप बनाकर, सब्जी, सलाद या ऑमलेट आदि में डालकर खाया जा सकता है।

6. डार्क चॉकलेट (Dark chocolate)- स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक डार्क चॉकलेट खाना तनाव से बचने का बेहद आसान और स्वादिष्ट तरीका है। डार्क चॉकलेट खाने से शरीर में फील गुड हार्मोन (feel good hormone) का स्त्राव होता है जिसके कारण व्यक्ति खुशी महसूस करता है और तनाव से राहत मिलती है।

7. जामुन (Blue berries)- जामुन में उच्च मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जिससे तनाव घटता है। जामुन को रोजाना खाने से तनाव, इन्सोमनिया (insomnia) और अन्य तरह के मूड डिस्ऑर्डर (mood disorder) से राहत मिलती है। जामुन को सलाद आदि में मिलाकर खाया जा सकता है। तनाव से राहत के लिए जामुन का जूस भी पीया जा सकता है।

 

Wednesday, 23 November 2016 09:52

त्वचा के रोम कूप यानि छिद्र और तैलीय ग्रंथि के बंद होने की वजह से चेहरे पर पिंपल्स (Pimples) निकलते हैं। इन्हें मुहांसे भी कहते हैं। यह कोई बीमारी नहीं है। आम तौर पर युवावस्था में लड़के-लड़कियों के चेहरे पर पिंपल्स ज्यादा निकलते हैं क्योंकि इसी उम्र में शरीर में हार्मोनल बदलाव होते हैं। 

 

पिंपल्स का बढ़ना (Pimples in Growth Years)

डर्मेटोलोजिस्ट की मानें तो युवावस्था में त्वचा की तेल ग्रंथियों पर बैक्टीरिया का आक्रमण ज्यादा तेज हो जाता है। त्वचा की तेल ग्रंथियों से तेल का स्राव ज्यादा होने लगता है। बैक्टीरिया की संक्रमण की वजह से त्वचा में सूजन हो जाती है, पस भर जाती है। नतीजा चेहरे पर पिंपल्स निकल आते हैं।
 
पिंपल्स (Muhase) की दूसरी बड़ी वजह जीवनशैली और फूड हैबिट भी है। ज्यादा वसा यानि तेल में फ्राई किया हुआ खाना खाने, चॉकलेट के सेवन से चेहरे पर पिंपल्स निकलने की संभावना रहती है। ज्यादा कब्ज की शिकायत रहने पर भी चेहरे पर पिंपल्स निकल सकते हैं। इसलिए कब्ज से बचने के लिए अपने भोजन में साबुत अनाज और साग को शामिल करें, ज्यादा पानी पिएं।

ग्रोथ इयर्स में अकसर मुहांसे हो जाते हैं लेकिन अगर मुहांसे अधिक हो तो यह चिंता का विषय होता है। मुहांसो (Muhanse) की समस्या निम्न वजहों के कारण भी हो सकती है: 

  • किशोरआयु के लड़के-लड़कियों में सेक्स हार्मोन एंड्रोजेन के स्राव की गति तेज होने से। 
  • ज्यादा मात्रा में जंक फूड और तेल में फ्राई किया हुआ भोजन खाने से। 
  • आनुवांशिक कारणों से भी चेहरे पर पिंपल्स निकलते हैं। 
  • कॉस्मेटिक्स का चेहरे पर ज्यादा इस्तेमाल। कॉस्मेटिक्स लगाने के बाद क्लींजिंग नहीं करने से भी चेहरे पर पिंपल्स (Pimples) निकल आते हैं।
  • मृत त्वचा कोशिका के दबाव और इन कोशिकाओं में बैक्टीरिया तेजी से बढ़ने के कारण पिंपल्स निकल आते हैं। 
  • पिंपल्स की दूसरी बड़ी वजह जीवनशैली और फूड हैबिट भी है। ज्यादा वसा यानि तेल में फ्राई किया हुआ खाना खाने, चॉकलेट के सेवन से चेहरे पर पिंपल्स निकलने की संभावना रहती है। 

सामान्य उपचार

पिंपल्स होने पर क्या न करें (Treatment of Pimples)

- अपने चेहरे को बार-बार न छुएं
- बालों को चेहरे और माथे पर गिरने न दें
- मेकअप से त्वचा के छिद्र बंद हो जाते हैं इसलिए मेकअप से परहेज बरतें और त्वचा को सांस लेने दें
- पिंपल्स को कभी भी दबाने या उसके अंदर के पस निकालने की कोशिश न करें, ऐसा करने पर गंभीर घाव हो सकते हैं
- चेहरे को दिन में दो बार से ज्यादा न धोएं। चेहरे को ज्यादा धोने पर त्वचा की तैलीय ग्रंथि ज्यादा सक्रिय हो जाती है और त्वचा से तेल का स्राव ज्यादा होने लगता है

पिंपल्स होने पर ऐसे करें उपचार (Tips to remove Pimples)

संतरे और नींबू के छिलके 
चेहरे पर साबुन लगाने की बजाय संतरे के छिलके का पाउडर या फिर ताजा संतरे या नींबू के छिलकों को लगाएं। इससे पिंपल्स की समस्या से छुटकारा मिलेगा।

एलोवेरा जूस
पिंपल्स वाली जगह पर एलोवेरा का जूस लगाएं। यह त्वचा को मुलायम बनाने के साथ-साथ पिंपल्स को भी कम करेगा।

लहसुन
लहसुन पिंपल्स की इलाज में रामबाण का काम करता है। लहसुन के एक दाने को पिंपल्स वाली जगह पर धीरे-धीरे लगाएं। अगर लहसुन न हो तो इसके पेस्ट को चेहरे पर लगाएं। आधा घंटा बाद चेहरा धो लें। काफी फायदा होगा।

कच्चा पपीता
कच्चे पपीते के जूस और उसके छिलके को कॉटन के कपड़े में लपेट कर मुंहासों वाली जगह पर लगाएं। काफी असर दिखेगा।

मिंट के पत्ते और जूस
मिंट के पत्ते और इसके जूस लगाने से भी मुंहासे दूर होते हैं। रात को सोते समय लगातार दो हफ्ते तक इसे चेहरे पर आजमाएं। काफी असर दिखेगा।

शहद और नींबू का रस
शहद और नींबू का रस भी पिंपल्स के इलाज में काफी कारगर है। शहद में नींबू का रस मिला कर पिंपल्स वाली जगह पर लगाएं। पिंपल्स खत्म हो जाएंगे।

स्टीम बाथ और आइस पैक
थोड़े गुनगुने पानी में नहाने के बाद चेहरे पर धीरे-धीरे बर्फ की मालिश करें। इससे त्वचा के छिद्र खुलते हैं।

 

और भी हैं कई घरेलू उपचार (Home Remedies of Pimples)
•हल्दी के पाउडर का पेस्ट
•नीम के पत्तियों का पेस्ट
•उजला टूथपेस्ट
•खीरे का जूस और खीरे का फेस पैक
•अंडे के सफेदी का फेस मास्क
•टमाटर का जूस और टमाटर का फेस पैक
•लैवेंडर ऑयल
•स्टीम बाथ

मुंहासों से निपटने के लिए घरेलू नुस्ख़े (Home Remedies For Pimples)

त्वचा में उपस्थित तेल ग्रंथियों (oil glands) द्वारा अतिरिक्त सीबम (sebum) का स्त्राव होने के कारण मुंहासे निकल आते हैं। इस दौरान तेल ग्रंथियां बैक्टीरिया से संक्रमित भी हो जाती हैं जिनसे मुंहासे फूलकर लाल हो जाते हैं और कई बार उनमें मवाद भी भर जाता है। मुंहासे ज्यादतर चेहरे, कंधे, गर्दन और पीठ पर निकलते हैं।

वैसे तो बाजार में मुंहासों से निपटने के लिए कई तरह की क्रीम, लोशन और चेहरे को धोने (face wash) के उत्पाद मौजूद हैं लेकिन इनका असर अधिक या लंबे समय तक नहीं होता है। इन उत्पादों का प्रयोग बंद करते ही समस्या फिर से पनपने लगती है।
मुंहासों के लिए कई ऐसे घरेलू नुस्खे मौजूद हैं, जो त्वचा के लिए भी नुकसानदायक नहीं है साथ ही मुंहासों को जड़ से समाप्त करेंगे। आइए जानते हैं कुछ ऐसे ही घरेलू नुस्खों के बारे में-

मुंहासों से निपटने के लिए घरेलू नुस्खे (Home Remedies for Pimples)

बर्फ (Ice)

बर्फ मुंहासों की सूजन और लालिमा को जल्द से जल्द ठीक करने का गुण रखती है। बर्फ प्रभावित क्षेत्र में रक्त परिसंचरण (blood circulation) दुरूस्त करती है जिससे त्वचा के कस जाते हैं और त्वचा पर मौजूद गंदगी और तेल साफ हो जाता है। उपचार के लिए किसी पतले कपड़े में बर्फ का टुकड़ा लेकर प्रभावित स्थान की सिकाई करें।

नींबू (Lemon)

नींबू में मौजूद विटामिन सी मुंहासों को जल्दी सूखने में मदद करता है। उपचार के लिए रूई को नींबू के रस में भिगोकर प्रभावित स्थान पर लगाएं या दालचीनी पाउडर में नींबू के रस की कुछ बूंदे मिलाकर रात में प्रभावित स्थान पर लगाकर सो जाएं। सुबह गुनगुने पानी से चेहरा साफ करें।

टूथपेस्ट (Toothpaste)

मुंहासों के इलाज में टूथपेस्ट भी बहुत कारगार उपाय है। लेकिन इसके लिए साधारण टूथपेस्ट का ही इस्तेमाल करना चाहिए। जेल वाले टूथपेस्ट का इस्तेमाल करने से बचें। बर्फ से मुंहासों को सेक कर, प्रभावित स्थान पर आधे घंटे के लिए टूथपेस्ट लगाकर छोड़ दें।

स्टीम (Steam)

स्टीम लेने से भी चेहरे के मुंहासे खत्म होते हैं। जब चेहरे पर भाप ली जाती है तो रोम छिद्र खुल जाते हैं, जिससे त्वचा खुल कर सांस लेती है और इस पर मौजूद गंदगी और तेल साफ हो जाते हैं। इतना ही नहीं पोर्स में मौजूद बैक्टीरिया भी स्टीम लेने से खत्म हो जाते हैं।

लहसुन (Garlic)

लहसुन एक एंटीसेप्टिक,  एंटीऑक्सीडेंट और एंटीवायरल एजेंट है। लहसुन में मौजूद सल्फर (Sulphar) भी मुंहासों को जल्दी ठीक करने के लिए उपयोगी है। उपचार के लिए लहसुन की कली को दो टुकड़ों में काटकर मुंहसों पर रगड़ें और पांच मिनट के लिए छोड़ दें। उसके बाद चेहरा धो लें।

बेकिंग सोडा (Baking Soda)

बेकिंग सोडा चेहरे का अतिरिक्त तेल, गंदगी और मृत त्वचा कोशिकाओं को हटाने में मदद करता है। नींबू के रस के साथ बेकिंग पाउडर लेकर मिश्रण तैयार करें। इस मिश्रण को मुंहासों पर लगाएं और सूखने तक छोड़ दें। इस मिश्रण को लगाने से जलन महसूस हो सकती है इसलिए इसे बहुत देर त्वचा पर नहीं रखना चाहिए।

शहद (Honey)

शहद भी मुंहासों को जल्द से जल्द ठीक करने का गुण रखता है साथ ही, यह एंटीबायोटिक दवाओं का भी एक स्त्रोत है,  इसलिए इसमें बैक्टीरिया को मारने की भी क्षमता होती है। उपचार के लिए रूई में थोड़ा सा शहद लेकर प्रभावित स्थान पर लगाएं और तकरीबन आधे घंटे के लिए छोड़ दें। शहद में दालीचीनी का पाउडर मिलाकर भी लगाया जा सकता है।

खीरा (Cucumber)

खीरा में मौजूद पोटेशियम के कारण खीरा लगाने से त्वचा को ठंडक मिलती है। खीरा में विटामिन ए, ई और सी भी मौजूद होते हैं। उपचार के खीरा को पीसकर, उसे चेहरे पर लेप की तरह लगाएं। तकरीबन 15 मिनट बाद चेहरा धो लें। इससे चेहरे के पोर्स की सफाई होगी साथ ही त्वचा के बैक्टीरिया भी खत्म होंगे।

पपीता (Papaya)

पपीता, एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन ए का उच्च स्त्रोत है। पपीते में मौजूद एंजाइम चेहरे पर मौजूद मुंहासों की सूजन को कम करके चेहरे को चिकना बनाते हैं। उपचार के लिए पपीते को क्रश करके चेहरे पर फेस मास्क की तरह लगाएं और तकरीबन 15 मिनट बाद चेहरा धो दें। इसके अलावा पपीते में शहद मिलाकर भी चेहरे पर लगाया जा सकता है।

दालचीनी पाउडर (Cinnamon Powder)

दालचीनी पाउडर भी मुंहासों के इलाज के लिए बेहद अच्छी घरेलू दवा है। दालचीनी में एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं। दालचीनी को सेब के सिरका के साथ मिलाकर मुंहासों पर लगाने से मुंहासे ठीक होते हैं। दालचीनी के साथ शहद मिलाकर भी चेहरे पर लगाया जा सकता है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

Wednesday, 23 November 2016 09:34

स्लिप डिस्क या कमर दर्द (Back Pain) कोई बीमारी नहीं है बल्कि यह एक तरह से शरीर की यांत्रिक असफलता (Mechanical Failure) है। कमर दर्द के सबसे महत्त्वपूर्ण कारण रीढ़ से या मेरुदंड (Spinal Cord) से जुड़े होते हैं स्पाइनल कॉर्ड या रीढ़ की हड्डी स्पाइन वर्टिब्रा (Vertebrae) से मिलकर बनती है जिस पर शरीर का पूरा वजन टिका होता है। यह सिर के निचले हिस्से से शुरू होकर टेल बोन (Tail Bone) तक होती है। हमारी रीढ़ की हड्डी में हर दो वर्टिब्रा (Vertebrae) के बीच में एक डिस्क होती है जो झटका सहने का यानि शाक एब्जार्वर (Shock Absorber) का काम करती है। आगे-पीछे, दायें-बायें घूमने से डिस्क का फैलाव होता है। गलत तरीके से काम करने, पढ़ने, उठने-बैठने या झुकने से डिस्क पर लगातार जोर पड़ता है।

इससे मेरुदंड की नसों (Nerves) पर दबाव आ जाता है जो कमर में लगातार होने वाले दर्द का कारण बनता है। इस डिस्क के घिस जाने से इसमें सूजन आ जाती है, और यह उभरकर बाहर निकल आती है। इसके बाद यह रीढ़ की हड्डी से पैरों तक जाने वाली नसों पर दबाव डालती है। नसें दबने के कारण यह दर्द पैरों तक भी जा सकता है। इसमें पैर सुन्न हो जाने का खतरा रहता है। दर्द इतना कष्टदायक होता है कि मरीज अपने दैनिक कार्य करने तक में असमर्थ हो जाता है। कमर दर्द ( Peeth Ka Dard) अब लोगों के लिए एक कष्टदायक समस्या बनी हुई है। आज हर उम्र के लोग इससे परेशान हैं और दुनिया भर में इसके सरल व सहज इलाज की खोज जारी है। दिनभर बैठे कर काम करने से यह समस्या और भी बढ़ जाती है। कमर दर्द अगर नीचे की तरफ बढ़ने लगे और तेज हो जाए, तो जल्द से जल्द डॉक्टर को दिखाएं। कभी-कभी दर्द कुछ मिनट ही होता है और कभी-कभी यह घंटों तक रहता है। 30 से 50 वर्ष की आयुवर्ग के लोग इसकी चपेट में अधिक आते हैं। वे महिला और पुरुष इसके अधिक शिकार होते हैं, जिन्हें अपने काम की वजह से बार-बार उठना, बैठना, झुकना या सामान उतारना, रखना होता है।

कमर दर्द के लक्षण

 

स्लिप डिस्क या कमर दर्द (Back Pain) होने के के कुछ प्रमुख कारण 

  • गलत पोश्चर (Posture),
  • लेटकर या झुककर पढ़ना या काम करना,
  • कंप्यूटर के आगे बैठे रहना,
  • अचानक झुकना,
  • वजन उठाना,
  • झटका लगना,
  • गलत तरीके से उठना-बैठना,
  • अनियमित दिनचर्या,
  • सुस्त जीवनशैली,
  • शारीरिक गतिविधियां कम होना,
  • गिरना,
  • फिसलना,
  • दुर्घटना में चोट लगना,
  • देर तक ड्राइविंग करना,
  • उम्र बढने के साथ-साथ हड्डियां कमजोर होने लगती हैं और इससे डिस्क पर जोर पड़ने लगता है,
  • कमर की हड्डियों या रीढ़ की हड्डी में जन्मजात विकृति या संक्रमण,
  • पैरों में कोई जन्मजात खराबी या बाद में कोई विकार पैदा होना।

सामान्य उपचार

 

  • कमर दर्द के ज्यादातर मरीजों को आराम करने और फिजियोथेरेपी से राहत मिल जाती है।
  • स्लिप डिस्क या कमर दर्द की समस्या होने पर दो से तीन हफ्ते तक पूरा आराम करना चाहिए।
  • दर्द कम करने के लिए डॉक्टर की सलाह पर दर्द-निवारक दवाएं, मांसपेशियों को आराम पहुंचाने वाली दवाएं लें।
  • जीवनशैली बदलें।
  • वजन नियंत्रित रखें। वजन बढ़ने और खासतौर पर पेट के आसपास चर्बी बढ़ने से रीढ़ की हड्डी पर सीधा प्रभाव पड़ता है।
  • नियमित रूप से पैदल चलें। यह सर्वोत्तम व्यायाम है।
  • शारीरिक श्रम से जी न चुराएं। शारीरिक श्रम से मांसपेशियाँ मजबूत होती हैं।
  • अधिक समय तक स्टूल या कुर्सी पर झुककर न बैठें। कुर्सी पर बैठते समय पैर सीधे रखें न कि एक पर एक चढ़ाकर।
  • अचानक झटके के साथ न उठें-बैठें। एक सी मुद्रा में न तो अधिक देर तक बैठे रहें और न ही खड़े रहें।
  • किसी भी सामान को उठाने या रखने में जल्दबाजी न करें। भारी सामान को उठाकर रखने की बजाय धकेल कर रखना चाहिए। जमीन से कोई सामान उठाना हो तो झुकें नहीं, बल्कि किसी छोटे स्टूल पर बैठें या घुटनों के बल नीचे बैठें और सामान उठाएं।
  • कमर झुका कर काम न करें। अपनी पीठ को हमेशा सीधा रखें।
  • ऊँची एड़ी के जूते-चप्पल के बजाय साधारण जूते-चप्पल पहनें।
  • सीढ़ियाँ चढ़ते-उतरते समय सावधानी बरतें।
  • यदि कहीं पर अधिक समय तक खड़ा रहना हो तो अपनी स्थिति को बदलते रहें।
  • दायें-बायें या पीछे देखने के लिए गर्दन को ज्यादा घुमाने के बजाय शरीर को घुमाएं।
  • देर तक ड्राइविंग करनी हो तो गर्दन और पीठ के लिए तकिया रखें। ड्राइविंग सीट को कुछ आगे की ओर रखें, ताकि पीठ सीधी रहे।
  • अधिक ऊँचा या मोटा तकिया न लगाएँ। साधारण तकिए का इस्तेमाल बेहतर होता है।
  • अत्यधिक मुलायम और सख्त गद्दे पर न सोएं। स्प्रिंगदार गद्दों या ढीले निवाड़ वाले पलंग पर सोने से भी बचें।
  • पेट के बल या उलटे होकर न सोएं।
  • परंपरागत तरीकों से आराम न पहुंचे तो सर्जरी ही एकमात्र विकल्प है। लेकिन सर्जरी होगी या नहीं, यह निर्णय पूरी तरह विशेषज्ञ का होता है। 

कमर दर्द से राहत के घरेलू उपाय (Home Remedies For Back Pain)

कमर की मांसपेशियों का असंतुलित होना ही कमर दर्द का कारण होता है। कमर दर्द सही तरह से न उठने-बैठने, सोने या कमर पर क्षमता से अधिक दबाव पड़ने से होता है। लगभग 80 % लोग कभी न कभी कमर दर्द से परेशान होते हैं। कमर दर्द नया भी हो सकता है और पुराना भी हो सकता है। सतही तौर पर देखने पर कमर में होने वाला दर्द भले ही एक सामान्य सी स्थिति लगती है, लेकिन इसे नज़रअंदाज करने से समस्या काफी बढ़ सकती है।

 

जानिए कमर दर्द दूर करने के घरेलू नुस्खे (Home Remedies for Back Pain):

1. घुटने मोड़ें (Band knee)- नीचे रखी कोई वस्तु उठाते वक्त पहले अपने घुटने मोड़ें फिर उस वस्तु को उठाएं। ऐसा करने से कमर पर अनावश्यक दबाव नहीं पड़ेगा और कम तकलीफ होगी।

2. लहसुन (Garlic)- भोजन में लहसुन का पर्याप्त उपयोग करें। लहसुन कमर दर्द का अच्छा उपचार माना गया है। लहसुन के प्रयोग से पुराने से पुराना कमर दर्द भी ठीक होने लगता है।

3. गूगुल (Benzoin)- गूगुल कमर दर्द में बेहद राहत देता है। कमर दर्द में उपचार के लिए गूगुल की आधा चम्मच गरम पानी के साथ सुबह-शाम सेवन करें। ऐसा करने से कमर दर्द में आराम मिलता है।

4. मसाला चाय (Tea)- चाय बनाने में 5 कालीमिर्च के दाने, 5 लौंग पीसकर और थोड़़ा सा सूखे अदरक का पाउडर डालें। दिन मे दो बार इस तरह की मसाला चाय पीएं। मसाला चाय पीते रहने से कमर दर्द में लाभ होता है।

5. सख्त बिस्तर (Tough Bedding)- सख्त बिस्तर पर सोने से भी कमर दर्द में बेहद आराम मिलता है। ऐसा करने से कमर समतल रहती है और पूरी कमर पर समान दबाव पड़ता है। औंधे मुंह पेट के बल सोना भी हानिकारक है।

6. दालचीनी (Cinnamon)- 2 ग्राम दालचीनी का पाउडर एक चम्मच शहद में मिलाकर दिन में दो बार लेते रहने से कमरदर्द में राहत मिलती है।

7. शरीर को गर्म रखें (Warm Body)- कमर दर्द पुराना हो तो शरीर को गर्म रखें और गरम वस्तुएं खाएं। ऐसा करने से कमर दर्द में बेहद राहत मिलती है। सर्दियों में दर्द ज्यादा हो तो ध्यान रखें कि दर्द वाला हिस्सा हवा के संपर्क में न आए।

8. बर्फ की सिकाई (Ice Foment)- दर्द वाली जगह पर बर्फ का प्रयोग करना भी लाभकारी उपाय है। इससे भीतरी सूजन भी समाप्त होगी। कुछ रोज बर्फ़ का उपयोग करने के बाद गरम सिकाई प्रारंभ कर देने से अनुकूल परिणाम आते हैं।

9. पौष्टिक भोजन (Proper Nutrition)- भोजन मे टमाटर, गोभी, चुकंदर, खीरा, ककड़ी, पालक, गाजर, फ़लों का प्रचुर मात्रा में उपयोग करें।

10. भाप की सिकाई (Steam Foment)- नमक मिले गरम पानी में एक तौलिया डालकर निचोड़ लें। पेट के बल लेटकर दर्द के स्थान पर तौलिये द्वारा भाप लेने से कमर दर्द में राहत मिलती है।

11. मालिश (Massage)- रोज सुबह सरसों या नारियल के तेल में लहसुन की तीन-चार कलियाँ डालकर (जब तक लहसुन की कलियाँ काली न हो जायें) गर्म कर लें फिर ठंडा कर प्रभावित जगह पर मालिश करें।

12. नमक (Salt)- कढ़ाई में दो-तीन चम्मच नमक डालकर इसे अच्छे से सेक लें। थोड़े मोटे सूती कपड़े में यह गरम नमक डालकर पोटली बांध लें। कमर पर इसके द्वारा सेक करें।

Wednesday, 23 November 2016 09:27

अच्छी नींद अच्छे स्वास्थ्य के लिए बेहद ज़रुरी भी है। ऐसा कहा जाता है "If you cannot sleep, you cannot heal", यानि अगर आप सोएंगे नहीं तो आप सही नहीं हो पाएंगे। नींद शरीर के लिए आराम करने का सबसे बेहतरीन तरीका है। आइएं समझें अपनी नींद को करीब से। 

 

क्यों जरूरी है नींद (Importance of Sleep)
हमारे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए पर्याप्त नींद बहुत ही जरूरी है। इंसान के शरीर को नींद की उतनी ही जरूरत है जितनी खाने पीने की। पर्याप्त नींद नहीं लेने से हमारी कार्यक्षमता पर भी बुरा असर पड़ता है।
हर उम्र में शरीर की नींद की अवधि की जरूरत बदलती है। नवजात शिशु 18 घंटे तक सोते हैं तो वयस्कों को औसतन आठ घंटे की नींद की जरूरत होती है।

पर्याप्त नींद के अभाव का सीधा असर हमारे शरीर की चयापचय प्रक्रिया (Metabolic Process) पर पड़ता है और इससे मधुमेह (Diabetes), वज़न का बढ़ना (Weight Gain), उच्च रक्त चाप (High Blood pressure) जैसी बीमारियां हो सकती हैं।

 

अनिद्रा की समस्या (About Insomnia or sleeplessness in Hindi)
चिकित्सा शास्त्र के अनुसार हफ्ते में तीन बार पूरी रात न सोने को नींद न आने की बीमारी यानि अनिद्रा (Anidra) समझा जाता है। अनिद्रा (Insomnia), दुनिया भर की आम स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है, जो किसी भी उम्र के पुरुषों और महिलाओं में हो सकती है। इन दिनों लोग विभिन्न प्रकार की अनिद्रा से पीड़ित हैं।

 

अल्पावधि अनिद्रा (Short term Insomnia)
अल्पावधि या तीव्र अनिद्रा, अनिद्रा का एक आम प्रकार है, यह कुछ दिनों के लिए होती है और कुछ दवाओं या जीवनशैली में किये गये मामूली बदलावों से होती है।

 

चिरकालीन अनिद्रा (About Chronic Insomnia in Hindi)
अगर अनिद्रा की समस्या काफी लंबे समय के लिए रहे तो यह आपके जीवन को प्रभावित कर सकती है। अगर एक व्यक्ति 30 दिनों से भी अधिक समय तक के लिये ठीक से ना सो पाए तो इसका अर्थ यह है कि वह चिरकालीन अनिद्रा (Chronic Insomnia) से पीड़ित है।

एक शोध के अनुसार, जो लोग कम सोते हैं या फिर अक्सर देर से सोते हैं, अन्य लोगों की तुलना में उनका नजरिया काफी नकारात्मक होता है और वे चिंताओं से घिरे रहते हैं। अमेरिका के बिंघमटन विश्वविद्यालय के जैकब नोटा का मानना है, ‘जो व्यक्ति नकारात्मक विचारों से परेशान है और सही समय पर नहीं सोता है तो उसे गहरी नींद नहीं आएगी'।

Wednesday, 23 November 2016 09:19

पाचनक्रिया के दौरान पेट में गैस का बनना एक सामान्य प्रक्रिया है। शरीर की अन्य प्रक्रियाओं की तरह पेट में गैस का बनना और बाहर निकल जाना भी एक सामान्य प्रक्रिया है।

कई बार पेट में गैस बनने की तीव्रता बढ़ जाती है और पेट के भीतर बनने वाली इस गैस के बाद पेट में तीव्र पीड़ा होने लगती है। अगर यह समस्या अकसर होने लगे तो यह गम्भीर बीमारी का रूप ले लेती है जिसे गैस्ट्रिक (Gastric Problem) के नाम से जाना जाता है। 

 

बदहजमी या गैस्ट्रिक की समस्या (Gastric Problem) 

मानव शरीर में गैस्ट्रिक म्यूकोसा (Gastric Mucosa) के द्वारा हाइड्रोक्लोरिक एसिड बनता है जो मानव शरीर पर प्रभाव डालता है और गैस की समस्या से निजात दिलाता है। अगर हाइड्रोक्लोरिक एसिड सही प्रकार से नहीं बनता है तो भोजन भी सही से नहीं पच पाता है।

आधुनिक जीवन शैली ने इस समस्या को बढ़ावा दिया है। गैस्ट्रिक बीमारी का सीधा संबंध खानपान से है। जो लोग भोजन में चटपटा, तला, मिर्च मसालेदार, खट्टा, नींबू, संतरा आदि का सेवन अधिक करते हैं उन लोगों को यह समस्या जल्दी होती है।

इनके अलावा जो लोग चाय, काफी, चालकेट, शराब का अधिक सेवन करते हैं, वे भी इस रोग से ग्रसित हो जाते हैं। तनावग्रस्त रहने वाले लोगों को भी गैस की समस्या (Gastric Problem) अधिक होती है।

बदहज़मी के लक्षण

 

गैस्ट्रिक प्रॉब्लम के कुछ प्रमुख कारण (Main Causes of Gastric Problem):

  • अनियमित जीवनशैली
  • ज्यादा तनाव
  • ज्यादा तला- भुना भोजन
  • स्मोकिंग, ड्रिंकिंग
  • राजमा, काले चने, सफेद चने, लोबिया, सूखे हरे मटर, पॉपकॉर्न, सूखी मक्कई जैसे अनाज पेट में गैस पैदा कर सकते हैं।

सामान्य उपचार

 

बदहजमी या गैस्ट्रिक की समस्या से निजात पाने का सबसे अच्छा तरीका है खानपान का ध्यान रखना। डॉक्टरों के अनुसार गैस्ट्रिक से निजात पाने के आसान उपाय निम्न हैं: 

 

बदहजमी के उपाय (Treatment of Gastric Problem)

  • गैस की बीमारी में उपचार के साथ अपनी जीवनशैली में बदलाव लाकर इससे छुटकारा पाया जा सकता है।
  • गैस्ट्रिक रोगियों को बचाव के लिये कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए ताकि रोग ज्यादा न बढ़ पाये।
  • दिन भर में मुख्य आहार 2 बार के स्थान पर 3-4 बार थोड़ी मात्रा में करें।
  • तनाव न लें और जल्दबाजी से बचें, गुस्से पर काबू रखें।
  • व्यायाम और गरम पानी पीने से भी गैस्ट्रिक के रोगियों को आराम मिलता है। 

बदहजमी के लिए घरेलू उपाय (Home Remedies For Gastric Problem)

Home Remedies for Gastric Problem

गैस को चिकित्सीय भाषा में अपच के रूप में जाना जाता है। गैस के लक्षण सूजन, डकार, जलन और मतली हो सकते है। गैस और अपच हमारे पेट में पाचक रस के स्राव से होने वाली समस्याएं हैं। पेट में मौजूद एसिड पेट के अंदर जलन पैदा करना शुरू कर देता है। इसमें व्यक्ति को बेचैनी, सीने और पेट में जलन महसूस होती है।

गैस की समस्या ज्यादा तैलीय या मसालेदार खाना खाने से होती है, साथ ही यदि पेट खाली है तब भी गैस की समस्या हो सकती है। बहुत ज्यादा चाय या कॉफ़ी पीने वालों को भी गैस की समस्या हो सकती है। गैस की समस्या यदि बढ़ जाए तो समस्या गंभीर हो सकती है इसलिए समय रहते इस पर काबू करना आवश्यक होता है। आइए आपको बताते हैं कुछ घरेलू उपाय जिन्हें अपनाकर आप गैस की समस्या से छुटकारा पा सकते हैं।

1. धनिया (Dhaniya)
धनिया के इस्तेमाल से पेट में गैस के कारण होने वाली जलन में राहत महसूस कर सकते हैं। एक गिलास छाछ में भुना हुआ धनिया मिलाकर पीने से गैस से राहत मिलती है।

2. सौंफ के बीज (Saunf seeds)
मसालेदार या वसायुक्त भोजन करने के कारण गैस और अपच जैसी समस्याएं होती हैं, इसके लिए सौंफ के बीच से इसका इलाज संभव है। सौंफ के बीज में मौजूद तेल, मतली और पेट फूलना जैसी समस्याओं से राहत देता है। सौंफ को सुखाकर, भूनकर उसका पाउडर बना लें। दिन में दो बार इस पाउडर के इस्तेमाल से गैस से काफी हद तक राहत मिल जाती है।

3. काली मिर्च (Black Peeper)
हमारे पेट में हाइड्रोक्लोरिक एसिड की कमी को पूरा करने के लिए काली मिर्च का उपयोग बहुत कारगर हो सकता है। काली मिर्च से आमाशय रस का प्रवाह बढ़ता है, जिससे यह पाचन में मदद करती है। गुड़ में काली मिर्च का पाउडर मिलाकर अपच के दौरान छाछ के साथ लिया जा सकता है। इसके अलावा काली मिर्च, सूखे पुदीना के पत्ते, सौंठ पाउडर और धनिया बीज बराबर मात्रा में मिलाकर पीने से भी अपच में फायदा होता है।

4. लौंग (Laung or Clove)
लौंग आंत गतिशीलता और जठरांत्र स्राव को बढ़ाती है जिससे गैस और अपच की समस्या खत्म हो जाती है। इसके लिए लौंग को चबाएं। पेट में जलन से छुटकारा पाने के लिए लौंग का तेल इस्तेमाल किया जा सकता है।

5. सेब का सिरका (Apple cider vinegar)
सेब का सिरका गैस और अपच दोनों से राहत देता है। यह हमारे पेट को आवश्यक एसिड प्रदान करता है। गैस के इलाज के लिए इसे पानी और शहद के साथ लिया जा सकता है।

6. छाछ (Butter Milk)
अपच और गैस के इलाज के लिए छाछ बहुत फायदेमंद है। इसमें अधिक लैक्टिक एसिड होता है और यह दूध की तुलना में पचने में आसान होता है।

7. बेकिंग सोडा (Baking Soda)
बेकिंग सोडा में अतिरिक्त एसिड का मुकाबला करने के लिए एक प्रभावी और सामान्य रूप से एंटासिड उपलब्ध रहता है। सोडा का मूल स्वभाव नमक और पानी के गठन से पेट में अतिरिक्त हाइड्रोक्लोरिक एसिड बनाना होता है। जिससे गैस से राहत मिलती है।

8. हर्बल चाय (Herbal Tea)
हर्बल चाय पाचन सहजता में प्रभावी ढंग से काम करती है। पुदीना, रैस्बेरी और ब्लैकबेरी चाय को अपच को कम करने के लिए खाना खाने के बाद लिया जा सकता है। पुदीना और कैमोमाइल (Mint and Camomile) तेज पेट दर्द होने पर फायदेमंद हैं।

9. लहसुन (Garlic)
लहसुन से मुँह में तेज गंध आ सकती है लेकिन इसकी छोटी सी कली में गैस की समस्या से राहत पाने के अभूतपूर्व गुण होते हैं। गैस को दूर करने में लहसुन बहुत फायदेमंद है। लहसुन का इस्तेमाल सूप में करने से यह पाचनशक्ति को और मजबूत करता है। इसके अलावा पानी में लहसुन को उबालकर उसमें काली मिर्च और जीरा डालें, इस घोल को ठंडा होने दें। इसे एक दिन में दो से तीन बार पीएं।

10. अदरक (Ginger)
अदरक खाने में न केवल सुगंध और चरपराहट जोड़ता है बल्कि खाने को पचाने में भी सहायक है। अदरक खाद्य पदार्थ के रूप में या अदरक की चाय में इस्तेमाल किया जाता है जिससे यह लार, पित्त रस और आमाशय रस में उत्तेजना पैदा करने में मदद करता है। कॉफी और सोडा की तुलना में अदरक की चाय पीना बहुत अधिक लाभदायक है।

11. इलायची (Elaichi)
इलायची पेट में गैस और में अपच में बहुत आरामदायक होता है। इसमें मौजूद वाष्पशील तेल पाचन विकार को दूर कर गैस और अपच से राहत देते हैं। इलायची के बीज का यूं ही सेवन किया जा सकता है या खाना पकाने, चाय आदि में भी इलायची या इलायची पाउडर का इस्तेमाल कर सकते हैं।

12. नींबू (Lemon)
गैस की रोकथाम और अपच के इलाज करने वाले प्राकृतिक उपायों में से एक नींबू है। गर्म पानी के साथ नींबू का रस मिलाकर पीने से उल्टी, गैस और डकार से छुटकारा मिल सकता है। यह एक सफाई एजेंट के रूप में, एक रक्त शोधक के रूप में कार्य करता है और पित्त रस का उत्पादन करके शरीर में पाचन तेज करता है। सुबह एक गिलास ताजे पानी में नींबू का रस मिलाकर पीने से भी पाचनतंत्र मजबूत होता है।

13. हींग (Hing)
हींग से पेट फूलना, पेट दर्द और कब्ज जैसी कई पाचन संबंधी समस्याओं का इलाज कर सकते हैं। एक चुटकी हींग दिन में दो से तीन बार गर्म पानी के साथ ली जा सकती है।

14. अजवाइन (Ajwain)
गैस से छुटकारा पाने के लिए दादी-नानी का नुस्खा है। इसके इस्तेमाल से पेट की लगभग हर समस्या का इलाज कर सकते हैं। तत्काल राहत के लिए अजवाइन में नमक मिलाकर पानी के साथ लें।

15. गर्म पानी (Warm water)
अन्य जड़ी बूटियों और मसालों के साथ इस्तेमाल करने के अलावा सिर्फ गर्म पानी भी आपको गैस और अपच से तत्काल राहत दे सकता है। यह शरीर में मौजूद सभी विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालकर हमारे शरीर की सफाई में मदद करता है। सुबह एक गिलास गर्म पानी और खाने के बाद गर्म पानी पीने से पाचन तंत्र मजबूत होता है।

Wednesday, 23 November 2016 06:55

मधुमेह या डायबिटीज हाल के सालों में होने वाला सबसे खतरनाक जीवनशैली रोग माना जाता है। हर साल कई हजार लोग इससे प्रभावित होते हैं। आइयें जानें मधुमेह के बारें में जिसे लोग आम बोलचाल की भाषा मे शुगर (Sugar ki Bimari) भी कहते हैं। 

 

मधुमेह या डायबिटीज (About Diabetes in Hindi)

किसी भी कार्य को करने के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है। शरीर को भी ऊर्जा की आवश्यकता होती है और रीर इसकी पूर्ति, शरीर में उपलब्ध ग्लूकोज़ से करता है।

रक्त से ग्लूकोज़ इन्सुलिन नामक हार्मोन के द्वारा कोशिकाओं में पहुंचकर ऊर्जा प्रदान करता है। शरीर में इन्सुलिन का उत्पादन अग्न्याशय (pancreas) के द्वारा होता है।

भोजन शरीर में जाकर ग्लूकोज़ में परिवर्तित हो जाता है और ग्लूकोज़ रक्त में मिल जाता है। मधुमेह रोगी शरीर में उपलब्ध ग्लूकोज़ का पूरा उपयोग नही कर पाता है।

मधुमेह, चयापचय विकार (Metabolic Disorder) है। रक्त में ग्लूकोज़ की बढ़ी हुई मात्रा का अगर सही समय पर उपचार नही किया जाये तो यह शरीर के महत्वपूर्ण अंगो के लिए काफी नुकसानदायक होती है।

 

मधुमेह के प्रकार (Types of Diabetes in Hindi)

मधुमेह को दो श्रेणियों में रखा गया है, शरीर का इन्सुलिन न बना पाना टाईप । मधुमेह (Type I Diabetes) और शरीर में उपस्थित इन्सुलिन का सही तरीके से काम नहीं करना टाईप ॥ मधुमेह (Type II Diabetes), जिसके कारण ग्लूकोज़ कोशिकाओं में नहीं जाता है और रक्त में उसकी मात्रा बढ़ जाती है।

टाईप 1 मधुमेह (Type 1 Diabetes): यह एक ऑटोइम्यून डिसऑर्डर (Autoimmune Disorder) है, इसमें शरीर की श्वेत कोशिकाएं अग्नाशय की इन्सुलिन बनाने वाली कोशिकाओं को नष्ट कर देती हैं।

टाईप 2 मधुमेह (Type 2 Diabetes): टाईप 2 मधुमेह में शरीर में उत्पादित इन्सुलिन का सही उपयोग नहीं हो पता है। शरीर में इन्सुलिन की अतिरिक्त मात्रा के कारण अग्नाशय इन्सुलिन नही बनाता है।

मधुमेह के लक्षण

 

मधुमेह के कई कारण होते हैं जैसे गलत जीवनशैली, मोटापा, अधिक मीठा खाना आदि। मधुमेह के जो कारण सबसे अधिक देखे जाते हैं वह निम्न हैं: 

मधुमेह होने के कारण (Causes of Diabetes in Hindi)

  • मोटापा (Diabetes due to Obesity): मोटापा टाईप 2 मधुमेह होने का सबसे बड़ा कारण है। 
  • आनुवांशिक (Hereditary): इसे खानदानी रोग भी कहते है। अगर परिवार में किसी को टाईप 2 मधुमेह है या था तो सावधानी बरतने की ज़रूरत है।
  • गर्भावस्था में रक्त में ग्लूकोज़ की अधिक मात्रा (High sugar levels during pregnancy)
  • रक्त वाहिका रोग (Blood vessel disease)
  • उच्च रक्त चाप और उच्च कोलेस्ट्रोल लेवल (High blood pressure, high cholesterol)
  • प्री डायबिटिक (Pre-diabetes or impaired fasting glucose)

सामान्य उपचार

 

मधुमेह या डायबिटीज से बचाव का सबसे बढ़िया उपाय है इसकी जानकारी रखना और स्वस्थ जीवनशैली अपनाना। डायबिटीज से बचने के कुछ खान उपाय निम्न हैं: 

मधुमेह से बचाव (Treatment and Remedies for Diabetes in Hindi)

  • प्रतिदिन एक घंटा व्यायाम जरूर करें।
  • अपने घर में प्रतिदिन मधुमेह का टेस्ट करें। रक्त में शुगर की मात्रा का ध्यान रखें।
  • इन्सुलिन इंजेक्शन (Insulin Injetion) को तैयार करना और स्वयं लगाना आना चाहिए।
  • एक इन्सुलिन पम्प (Insulin Pump) साथ रखना।
  • कार्बोहाइड्रेट (Carbohydrate) की गिनती को ध्यान में रखना।
  • रक्तचाप (Blood Pressure) कम होने पर मत्वपूर्ण जानकारी का ध्यान रखना

योग आसन (Yog Aaasan for Diabetes)

  • प्राणायाम
  • सेतुबंधासन
  • बालासन
  • वज्रासन
  • सर्वांगासन

अन्य उपचारआयुर्वेद

घरेलू उपचार मधुमेह 1 (Home Treatment 1 Diabetes)

  • दिन में एक बार 2 चम्मच करेले के रास का सेवन करें।
  • दिन में दो बार 1 चम्मच मेथी के पाउडर का सेवन पानी के साथ अवश्य करें।  
  • दिन में एक बार 2 चम्मच कड़वी लौकी के रस को एक चम्मच आंवला के रास के साथ मिलकर कर सेवन करें।
Wednesday, 23 November 2016 06:52
  • आयुर्वेदिक दवाएं बहुत सुरक्षित हैं और काफी हद तक समस्या का इलाज है। कुछ आम दवाओं कंटकारी अवालेह, अगस्त्याप्रश, चित्रक, कनाकसव का प्रयोग किया जा सकता है। 
  • रात का खाना हल्का व सोने से एक घंटे पहले लें।
  • सुबह या शाम टहलें और योग में मुख्य रूप से ‘प्राणायाम’ और भावातीत ध्यान करें।
  • अधिक व्यायाम से बचे।
  • हवादार कमरे में रहें और सोएं। एयर कंडीशनर, कूलर और पंखों की सीधी हवा से बचें।
  • ठंडे और नम स्थानों से दूर रहें।
  • धूम्रपान चबाने वाली तम्बाकू, शराब और कृत्रिम मिठास और ठंडे पेय न लें। जिन्हें इत्र से इलर्जी हैं, वे अगरबत्ती, मच्छर रेपेलेंट्स का प्रयोग न करें।
  • 2/3 गाजर का रस, 1/3 पालक का रस, एक गिलास रोज पिएं।
  • जौं, कुल्थी, बथुआ, द्रम स्तिच्क अदरक, करेला, लहसुन का अस्थमा में नियमित रूप से सेवन किया जा सकता है।
  • मूलेठी और अदरक 1/2-1/2 चम्मच एक कप पानी में लेना बहुत उपयोगी होता है।
  • तुलसी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है।
  • जो लोग इस रोग की चपेट में आ चुके हैं, उनके लिए हर ऋतु के प्रारम्भ में एक-एक सप्ताह तक पंचकर्म की नस्य या शिरोविरेचन चिकित्सा इस रोग की रोकथाम में सहायक होती है।
  • दिल्ली के शालीमार बाग स्थित महर्षि आयुर्वेद अस्पताल में इसकी अच्छी व्यवस्था है।
  • रात-विरात यदि दमा प्रकुपित हो जाए, तो छाती और पीठ पर गर्म तिल तेल का सेंक करें।
  • घर में एक शीशी प्राणधारा की अवश्य रखें। उसमें अजवाइन का सत् होता है, जिसकी भाप दमा के दौरे में राहत देती है।
  • 1/4 चम्मच सोंठ, छ: काली मिर्च, काला नमक 1/4 चम्मच, तुलसी की 5 पत्तियों को पानी में उबाल कर पीने से भी दमा में आराम मिलता है।
  • 1/4 प्याज का रस, शहद एक चम्मच, काली मिर्च 1/8 चम्मच को पानी के साथ लें।
Wednesday, 23 November 2016 06:46

आयुर्वेद में किफायती और केमिकल रहित अनेक उपाय हैं जो त्वचा को मुलायम (Soft), कोमल (Supple) और सुंदर (Beautiful) बनाते हैं। इन्हें जानने से पहले आइये उन कारणों के जानते हैं जो हमारी त्वचा को रुखा बनाते हैं।

त्वचा में रुखेपन के कारण (Causes of Dryness in Skin)

  • उम्र का बढ़ना
  • मौसम में परिवर्तन
  • शरीर में वात (Vata) का बढ़ जाना
  • तनाव (Stress)
  • संतुलित भोजन (Balanced Diet) न ग्रहण करना

त्वचा में रुखेपन के आयुर्वेदिक नुस्खे (Ayurvedic Tips to curb Dryness in Skin)

1. सब्जियों का सेवन (Intake of Vegetables)

हमें पानी से भरी सब्जियों का सेवन करना चाहिए जो पाचन में आसान होती हैं जैसे गाजर, लौकी, खीरा, मूली आदि। यह सब्जियाँ त्रिदोषक होती हैं और हर प्रकार की त्वचा के लिए लाभदायक होती हैं। हमें प्रतिदिन कम से कम तीन सब्जियों का सेवन करना चाहिए। 

2. चिड़िया की तरह सेवन (Eat Like A Bird)

परम्परागत आयुर्वेद में बताया गया है की हमें सीड्स और नट्स (Seeds and Nuts) का सेवन भोजन के साथ करना चहिये। ऐसा करने से हमारी त्वचा में अच्छा बदलाव आता है और वह साफ़ दिखाई देता है। वात के कारण हमारी तवचा खुश्क (Dry Skin) हो जाती है परन्तु सीड्स और नट्स में ओमेगा 3 (Omega 3) और प्राकृतिक फैट्स पाये जाते है जो त्वचा को संतुलन प्रदान करते हैं। इनमे फाइबर (Fiber) भी पाया जाता है जो हमारे हाजमे की कमजोरी को दूर करता है। 

3. हर्बल चाय (Herbal Tea only)

वात से खुश्की बढ़ जाती है और नमी की कमी के कारण त्वचा की कोमलता नष्ट हो जाती है। इससे बचने के लिए हम गर्म पदार्थ जैसे हर्बल टी आदि का दिन में कई बार सेवन कर सकते हैं। अदरक और नींबू के मिश्रण से तैयार चाय का सेवन करने से त्वचा हमेशा चमकती रहती है। इससे पाचन भी ठीक रहता है। 

4. व्यायाम कीजिये (Do Exercise)

व्यायाम से हम शरीर में वात का बढ़ना रोक सकते हैं। यही नही, व्यायाम करने से हमारे शरीर के टॉक्सिन्स पसीने के रूप में बहार निकल जाते हैं, जो स्वतः अपने आप में त्वचा की चमक बरकरार रखने में महत्वपूर्ण होता है। 

5. श्वास प्रक्रिया (Breathing)

मानसिक और भावुक तनाव भी शरीर में वात बढ़ा देता है, जिससे त्वचा का रूखापन बढ़ जाता है। श्वास प्रक्रिया पर ध्यान देने से हम तनाव मुक्त हो सकते हैं और अपने शरीर में वात को बढ़ने से रोक सकते हैं।

Wednesday, 23 November 2016 06:44

हमें अपनी त्वचा की देखभाल भी प्राकृतिक तरीके (Natual Skin Care) से ही करना चाहिए क्योंकि प्रकृति में ही छिपा है हमारी सुंदरता का राज। बस हमें इसके असर और इस्तेमाल की जानकारी होनी चाहिए। इसमें न तो कोई साइड इफेक्ट का डर है और न ही किसी रिएक्शन का खतरा।

चेहरे और त्वचा का सौन्दर्य, रंगत और कोमलता बढ़ाना चाहते हैं तो हमें प्राकृतिक सौन्दर्य प्रसाधन का इस्तेमाल इसलिए भी करना चाहिए क्योंकि इससे हमारे चेहरे और त्वचा में कुदरती आभा आएगी और यह सुंदरता टिकाऊ भी होगी।

त्वचा को सबसे ज्यादा नुकसान (Harmful Elements for Skin) सूर्य की अल्ट्रावायलेट किरणों, धूप, प्रदूषण, तनाव, नींद की कमी, ध्रूमपान और शराब के सेवन से होती है।

बाजार में बिकने वाले महंगे सौंदर्य उत्पाद पर यकीन करने की बजाय अगर हम घरेलू और आयुर्वेदिक नुस्खों (Home based Ayurvedic Remedies) को आजमाएं तो त्वचा में निखार और चमक आने के साथ-साथ त्वचा स्वस्थ भी रहेगी।

ग्लोइंग स्किन 10 आयुर्वेदिक नुस्खे (Ayurvedic Tips for Glowing Skin)

1. हल्दी से हटते हैं मुहांसे 
हल्दी एक प्राकृतिक एंटीसेप्टिक एंटी-फंगल है। इसके लेप लगाने से त्वचा पर मुहांसे, पिंपल और पिग्मेंटेशन नहीं होते हैं।

2. चंदन से स्किन में आता ग्लो
बाजार में त्वचा की देखभाल के लिए बिकने बनने वाले ज्यादातर कॉस्मेटिक में चंदन का इस्तेमाल होता है। चंदन से त्वचा में निखार आता है। चंदन त्वचा को ठंडक भी पहुंचाता है। इसके इस्तेमाल से त्वचा पर दाने और मुहांसे नहीं होते हैं।

3. एलोवेरा त्वचा की करती सुरक्षा
एलोवेरा एक नेचुरल एंटी क्लिंजर (Natural Skin Cleanser) है। इससे त्वचा चमकदार बनती है। इसमें पाए जाने वाले एंटी इंफ्लेमटरी गुण से त्वचा की बाहरी परत को सुरक्षा मिलती है। इसके इस्तेमाल से स्किन इंफेक्शन (Skin Infection) होने पर होने वाली जलन भी कम होती है।

4. नीम की पत्ती से त्वचा में आती चमक
त्वचा के लिए नीम की पत्ती काफी कारगर होती है। इससे त्वचा में प्राकृतिक निखार आता है। नीम की पत्ती के पाउडर और पिसी हुई गुलाब की पंखुड़ी को नींबू के रस के साथ मिलाकर लगाने से त्वचा में चमक आती है।

5. एवाकाडो से स्किन को मिलता प्रोटीन
एवाकाडो (Avocado) से त्वचा में प्राकृतिक चमक आती है। यह ड्राय स्किन वालों के लिए काफी कारगर है। एवाकाडो में प्रोटीन होता है, जो त्वचा के लिए काफी फायदेमंद है।

6. नींबू से मिटती हैं झुर्रियां
चेहरे पर नींबू का रस लगाएं। निचोड़े गए नींबू के छिलके भी चेहरे पर कुछ दिन तक मल सकते हैं। इससे चेहरे की झुर्रियां मिटेंगी। मुंह धोते समय गालों को हथेलियों से थपथपाकर सुखाएं, इससे गालों में रक्त का संचार बढ़ता है और झुर्रियां मिट जाती हैं।

7. डार्क स्पॉट मिटाने के लिए टमाटर है कारगर
चेहरों का डार्क स्पॉट (Dark Spots) मिटाने में टमाटर काफी असरदार है। टमाटर के रस में नींबू का रस, हल्दी पाउडर और बेसन मिलाकर लेप बना लें। इस लेप को गालों पर लगाएं। सूखने के बाद पानी से चेहरे को धो लें। रोज एक बार इसे आजमाएं। डार्क स्पॉट खत्म हो जाएँगे।

8. चुकंदर चेहरे को बनाएगी गुलाबी
चुकंदर का सेवन त्वचा में गुलाबी निखार लाता है। चुकंदर में काफी मात्रा में आइरन होता है, जिससे हीमोग्लोबिन मिलता है। इसे पीस कर चेहरे पर भी लगा सकते हैं। रोजाना इसे आजमाने से चेहरे पर गुलाबी निखार आता है।

9. अंकुरित चना और मूंग खाएं
अंकुरित चना और मूंग सुबह-शाम खाएं। इससे चेहरे की झुर्रियां खत्म होंगी। चना और मूंग में विटामिन ई होता है, जो झुर्रियां मिटाने में कारगर होता है। चना और मूंग नियमित खाने से स्किन में ग्लो आता है।

10. गाजर का रस पीएं
गाजर में एंटी ऑक्सीडेंट पाया जाता है, एक ग्लास गाजर का रस रोज पिएं। इससे त्वचा में निखार आता है, झुर्रियां गायब होती हैं।

Wednesday, 23 November 2016 06:40

सिर्फ महिलाओं ही नहीं बल्कि पुरुषों को भी अपने बालों से प्यार से होता है। कुछ को तरह-तरह के हेयर स्टाइल पर प्रयोग करना पसंद आता है तो कुछ को अपने कुदरती केश विन्यास पर ही नाज होता है। बदलते जमाने के साथ फैशनबल दिखने की होड़ में अब हेयर स्टाइल को लेकर रोज नए-नए प्रयोग हो रहे हैं। नतीजा असमय ही बालों का झड़ना-टूटना, बालों का कमजोर होना जैसी शिकायतें आम होने लगी हैं। फैशन, प्रदूषण, अनहेल्दी खाना और तनाव ने हसीन जुल्फों को दिन में दिखने वाले सपने जैसा बना दिया है। मगर यह सपना हकीकत भी बन सकता है अगर हम कुछ नेचुरल हेयर केयर टिप्स आजमाएं।

नारियल तेल की मालिश
नारियल तेल के फायदे को हम भूलते जा रहे हैं। बालों की मजबूती के लिए नारियल तेल काफी फायदेमंद है। रोजाना अगर हम 15 मिनट तक बालों की मसाज नारियल तेल से करें तो बाल सिल्की तो होंगे ही, बालों का झड़ना भी बंद हो जाएगा।

शहद और अंडे की मालिश
शहद बालों के पोषण के लिए बेस्ट है। इससे बालों की जड़ों को पोषण मिलता है। अगर शहद के साथ अंडे की जर्दी मिला दे तो इसका असर दोगुना हो जाता है। बालों की जड़ यानि स्कैल्प को इससे जरुरी प्रोटीन यानि केराटिन मिलता है।

भृंगराज के तेल की मालिश
भृंगराज के औषधीय गुणों से बालों को काफी फायदा पहुंचता है। रोजाना भृंगराज के तेल से बालों की मालिश करने से बाल काले और घने होते हैं। इससे बालों का झड़ना बंद हो जाता है। इसे लगाने से बालों में रुसी भी कम होती है। यह सर को ठंडक भी पहुंचाता है।

 

बालों से जुड़े अन्य असरदार टिप्स: 
Bridal Tips For Shiny Hairs In Hindi
Hair Fall Reasons And Remedies For Women
Top 10 Hair Growth Tips

 

बादाम के तेल की मालिश
बादाम न सिर्फ दिमाग को तंदुरुस्त रखता है बल्कि बालों को भी जरुरी पोषण देता है। बादाम में विटामिन ई पाया जाता है जिससे बालों को मजबूती मिलती है। हफ्ते में एक दिन बादाम तेल से बालों की मालिश जरुर करनी चाहिए। इसके इस्तेमाल से बालों का झड़ना रुकता है।

बालों को मॉइश्चराइज करें
बालों के मॉइश्चराइजेशन के लिए पांच प्रकार के तेलों का इस्तेमाल करें। बादाम, कैस्टर, जैतून, नारियल और लैवेंडर के तेल की बराबर मात्रा ले कर इसे मिक्स कर लें। इस मिक्स ऑयल से बालों की मसाज करें और फिर इसे चार घंटे तक छोड़ दें। इसे हफ्ते में दो दिन आजमाएं। बाल में शाइनिंग तो आएगी ही साथ ही बालों की जड़ों को मजबूती भी मिलेगी।

हेयर केयर के लिए क्या करें
- बालों के स्कैल्प साफ रखें
- रोजाना माइल्ड शैंपू करें
- हफ्ते में एक दिन 15 मिनट तक बालों की मसाज तेल से करें
- हमेशा हर्बल हेयर प्रोडक्ट का इस्तेमाल करें
- रूखे और बेजान बालों में सीरम का प्रयोग करें। इससे बालों में शाइनिंग आएगी
- बालों को सूखा रखें
- बालों की जड़ों की मसाज करें

हेयर केयर के लिए क्या नहीं करें
- हेयर कलर से संभव हो तो परहेज करें
- हेयर जेल व हेयर स्प्रे का इस्तेमाल ज्यादा नहीं करें
- गीले बालों को नहीं बांधें इससे स्किन इंफेक्शन का खतरा रहता है
- बालों की सुंदरता के लिए बाजार में बिकने वाले हेयर कलर, हेयर डाई, जेल के ज्यादा इस्तेमाल से बचें.

Wednesday, 23 November 2016 06:17

वायरल बुखार के लक्षण

  1. आँखें लाल होना
  2. इस बुखार में शरीर का ताप 101 डिग्री से 103 डिग्री या और ज्यादा भी हो जाता है
  3. खांसी और जुकाम होना
  4. जोड़ों में दर्द और सूजन होना
  5. थकान और गले में दर्द होना
  6. नाक बहना होना
  7. बदन दर्द होना
  8. भूख न लगना
  9. लेटने के बाद उठने में कमजोरी महसूस करना
  10. सिरदर्द होना

वायरल बुखार शरीर के कमज़ोर प्रतिरक्षा तंत्र (Immune System) की वजह से होता है। अगर शरीर की प्रतिरक्षण क्षमता या इम्यून सिस्टम मजबूत हो तो यह बीमारी जल्दी नहीं होती। 

सामान्य उपचार

वायरल बुखार का उपाय (Treatment of Viral Fever)

वायरल बुखार अकसर सामान्य बुखार ही लगता है इसलिए बुखार होने पर डॉक़्टर के पास जरूर जाना चाहिए ताकि यह पता चल सके कि वायरल बुखार है या नहीं। वायरल बुखार (Viral Fever) होने पर निम्न उपाय अपनाने चाहिए: 

बुखार अगर 102 डिग्री तक है और कोई और खतरनाक लक्षण नहीं हैं तो मरीज की देखभाल घर पर ही कर सकते हैं।

मरीज के शरीर पर सामान्य पानी की पट्टियां रखें। पट्टियां तब तक रखें, जब तक शरीर का तापमान कम न हो जाए। पट्टी रखने के बाद वह गरम हो जाती है इसलिए उसे सिर्फ 1 मिनट तक ही रखें।

अगर माथे के साथ - साथ शरीर भी गर्म है तो नॉर्मल पानी में कपड़ा भिगोकर निचोड़ें और उससे पूरे शरीर को पोंछें।

मरीज को हर छह घंटे में पैरासिटामॉल (Paracetamol) की एक गोली दे सकते हैं। दूसरी कोई गोली डॉक्टर से पूछे बिना न दें।

बच्चों को हर चार घंटे में 10 मिली प्रति किलो वजन के अनुसार दवा दे सकते हैं।

दो दिन तक बुखार ठीक न हो तो मरीज को डॉक्टर के पास जरूर ले जाएं।

साफ - सफाई का पूरा ख्याल रखें। मरीज को वायरल है, तो उससे थोड़ी दूरी बनाए रखें और रोगी के द्वारा इस्तेमाल की गई चीजें इस्तेमाल न करें।

मरीज को पूरा आराम करने दें, खासकर तेज बुखार में। आराम भी बुखार में इलाज का काम करता है।

मरीज छींकने से पहले नाक और मुंह पर रुमाल रखें। इससे वायरल होने पर दूसरों में फैलेगा नहीं।

वायरल फीवर में एंटीबॉयटिक दवाओं की कोई भूमिका नहीं होती। वायरल फीवर 5 से 7 दिनों में ठीक हो जाता है। 

इस रोग का इलाज लक्षणों के आधार पर किया जाता है, रोगी को पर्याप्त मात्रा में ग्लूकोज और इलेक्ट्रोलाइट लेना चाहिए।

वायरल बुखार के लिए घरेलू उपचार (Home Remedies For Viral Fever)

Home Remedies for Viral Fever

तापमान में अचानक परिवर्तन होने या संक्रमण का दौर होने पर अधिकतर लोग बुखार से पीड़ित होते हैं। ऐसा ही एक मौसमी संक्रमण वाला बुखार होता है वायरल बुखार (Viral Fever)। इस बुखार से निपटने के लिए कुछ एंटीबायोटिक दवाओं या कुछ ओटीसी (ओवर-द-काउंटर) का सहारा लिया जाता है। आप चिकित्सक के पास जाएं उससे पहले कुछ घरेलू नुस्खे आजमाकर भी बुखार को कम या इससे पूरी तरह आराम पाया जा सका है। वायरल बुखार के के लिए प्राकृतिक इलाज सुरक्षित और आसानी से उपलब्ध है। आइए आपको बताते वायरल बुखार के इलाज के लिए कुछ आसान घरेलू उपचार, जो कि निम्नलिखित हैं-

1. धनिया चाय (Coriander Tea)

धनिया के बीज में phytonutrients होते हैं जो कि शरीर को विटामिन देते हैं और अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली को भी बढ़ाते हैं। धनिया में मौजूद एंटीबायोटिक यौगिक वायरल संक्रमण से लड़ने की शक्ति देते हैं।

कैसे तैयार करें- एक गिलास पानी में एक बड़ा चम्म्च धनिया के बीच डालकर उबाल लें। इसके बाद इसमें थोड़ा दूध और चीनी मिलाएं। धनिया की चाय तैयार है, इसे पीने से वायरल बुखार में बहुत आराम मिलता है।

2. डिल बीज का काढ़ा (Brew of Dill seed)

प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने और शरीर को आराम देने के अलावा, डिल बीज शरीर के तापमान को कम करने में भी उपयोगी होते हैं। इसका कारण इनमें Flavonoids Osmond Pins उपस्थिति होते हैं। डिल बीज का काढ़ा वायरल बुखार में राहत देने के साथ ही शक्तिशाली रोगाणुरोधी एजेंट का कार्य करता है।

कैसे तैयार करें- एक कप उबलते पानी में डिल बीज डालें और उबलनें दें इसके बाद इसमें एक चुटकी दालचीनी डालें। गर्म चाय की तरह पिएं।

3. तुलसी के पत्ते का काढ़ा (Brew of Basil leaves)

वायरल बुखार के लक्षण होने पर प्राकृतिक उपचार के लिए सबसे प्रभावी और व्यापक रूप से इस्तेमाल की जाने वाली औषधि है तुलसी के पत्ते। बैक्टीरियल विरोधी, कीटाणुनाशक, जैविक विरोधी और कवकनाशी गुण तुलसी को वायरल बुखार के लिए सबसे उत्तम बनाते हैं। 

कैसे तैयार करें- आधे से एक चम्मच लौंग पाउडर को करीब 20 ताजा और साफ तुलसी के पत्तों के साथ एक लीटर पानी में डालकर उबाल लें। पानी को तब तक उबालें जब तक कि पानी घट कर आधा न रह जाए। इस काढ़े का हर दो घंटे में सेवन करें।

4. चावल स्टार्च (Rice starch)

वायरल बुखार के इलाज के लिए प्राचीन काल से आम घर उपाय है चावल स्टार्च (हिंदी में कांजी के रूप में जाना जाता है)। यह पारंपरिक उपाय प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ा देता है। यह विशेष रूप से वायरल बुखार से पीड़ित बच्चों और बड़े लोगों के लिए, एक प्राकृतिक पौष्टिक पेय के रूप में कार्य करता है।

कैसे तैयार करें- एक भाग चावल और आधा भाग पानी डालकर चावल के आधा पकने तक पकाएं। इसके बाद पानी को निथार कर अलग कर लें और इसमें स्वादानुसार नमक मिलाकर, गर्म गर्म ही पिएं। इससे वायरल बुखार में बहुत आराम मिलता है। 

5. सूखी अदरक मिश्रण (Dry ginger mixture)

अदरक स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी है। इसमें एंटी फ्लेमेबल, एंटीऑक्सिडेंट और वायरल बुखार के लक्षणों को कम करने के लिए Analgesic गुण होते हैं। इसलिए, वायरल बुखार से पीड़ित लोगों को परेशानी को दूर करने के लिए शहद के साथ सूखी अदरक का उपयोग करना चाहिए।

कैसे करें तैयार- एक कप पानी में दो मध्यम आकार के सूखे टुकड़े अदरक या सौंठ पाउडर को डालकर उबालें। दूसरे उबाल में अदरक के साथ थोड़ी हल्दी, काली मिर्च, चीनी आदि को उबालें। इसे दिन में चार बार थोड़ा थोड़ा पिएं। इससे वायरल बुखार में आराम मिलता है। 

6. मेथी का पानी (Fenugreek Water)

रसोई घर में आसानी से उपलब्ध, मेथी के बीज में डायेसजेनिन, सपोनिन्स और एल्कलॉइड जैसे औषधीय गुण शामिल है। मेथी के बीजों का प्रयोग अन्य बहुत सी बीमारियों के इलाज में भी किया जाता है और यह वायरल बुखार के लिए बेहतरीन औषधि है।

कैसे तैयार करें- आधा कप पानी में में एक बड़ा चमचा मेथी के बीच भिगोएँ। सुबह में, वायरल बुखार के इलाज के लिए नियमित अंतराल पर इस पेय को पिएं। कुछ और राहत के लिए मेथी के बीज, नींबू और शहद का एक मिश्रण तैयार कर उसका प्रयोग भी किया जा सकता है। 

नोट- ये केवल घरेलू उपचार हैं, और इन्हें चिकित्सा सलाह के स्थान पर प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए। यदि आपका बुखार नहीं उतर रहा है तो आपको डॉक्टरी सलाह लेनी चाहिए और उनके दिशा निर्देश का पालन करना 

 

Wednesday, 23 November 2016 06:14

      Typhoid बुखार का निदान / Diagnosis कैसे किया जाता हैं ?

      Typhoid बुखार का निदान करने के लिए, Typhoid बुखार के लक्षण पाये जानेवाले व्यक्तिओ में निम्नलिखित जांच किये जाते है :

     Typhidot Test : रोगी के रक्त का नमूना एक किट में डालकर जांच की जाती हैं। इसका परिणाम Positive आनेपर Typhoid बुखार का निदान किया जाता हैं। 

     Blood Culture : यह बिमारी के पहले हफ्ते में रक्त में Typhoid बुखार का बैक्टीरिया की मौजूदगी की जांच करने के लिए किया जाता हैं। 

     Stool Culture : यह रोगी व्यक्ति के मल में Typhoid बुखार का बैक्टीरिया की मौजूदगी की जांच करने के लिए किया जाता हैं।  

     WIDAL Test : इस जांच में रोगी व्यक्ति के रक्त की जांच की जाती हैं। इसमें O और H antigen में 180 से ज्यादा अनुपात आने पर Typhoid बुखार का निदान किया जाता हैं। 

     Sonography / Xray : पीड़ित व्यक्ति पेट को अधिक पेट दर्द और उलटी होने पर आंतो में अल्सर का निदान करने हेतु यह जांच की जाती हैं।  

     इनके अलावा भी रोगी के समस्या अनुसार अन्य जांच की जा सकती हैं। 

     Typhoid बुखार का ईलाज कैसे किया जाता हैं ?

    Typhoid बुखार का ईलाज करने के लिए Antibiotics का इस्तेमाल किया जाता हैं। 

    पहले के ज़माने लगभग 20% Typhoid बुखार के रोगियों की मृत्यु हो जाती थी परंतु अब ज्यादा असरदार Antibiotics का उपयोग करने के कारण सिर्फ 1 से 2% रोगियों की ही मृत्यु होती है और वह भी किसी बड़े complication के कारण होती हैं। 

    अगर पीड़ित व्यक्ति को ज्यादा कमजोरी नहीं है और आहार अच्छे से ले रहा है तो घर पर भी Antibiotics दवा लेकर Typhoid बुखार का ईलाज किया जा सकता हैं। कम से कम 2 हफ्तों तक Typhoid बुखार की दवा लेना होता हैं। 

    अधिक कमजोरी और उलटी, दस्त इत्यादि समस्या होने पर हॉस्पिटल में दाखिल होकर ईलाज कराना जरुरी होता हैं। 

    Typhoid बुखार के कारण आंतो में अल्सर होने पर जरुरत पड़ने पर operation भी किया जाता हैं। 

    Typhoid बुखार से बचने के लिए क्या एहतियात बरतने चाहिए ?

    Typhoid बुखार से बचने के लिए निम्नलिखित एहतियात बरतना चाहिए 

 

    Typhoid vaccine / लसीकरण : Typhoid बुखार से बचने के लिए दो तरह की vaccine उपलब्ध हैं। पहले तरह की Typhoid vaccine में injection दिया जाता है। यह vaccine 2 वर्ष से ऊपर के आयु के व्यक्तिओ में ही दी जाती हैं। दूसरी तरह की Typhoid vaccine       में 4 गोलिया दी जाती है जिसमे से एक गोली एक दिन छोड़कर (1, 3, 5, 7) खाना होता हैं। यह vaccine 6 वर्ष से ऊपर के व्यक्तिओ में ही दी जाती हैं। इन दोनों vaccine का असर 2 हफ्ते बाद होता है और Typhoid बुखार के खिलाफ कुछ प्रमाण में प्रतिरोध शक्ति का     निर्माण होता हैं। याद रहे की यह दोनों vaccine से 100% सुरक्षा की गारंटी नहीं मिलती हैं।  

    पानी : पिने के लिए हमेशा स्वच्छ पानी का उपयोग करे। अगर घर में RO नहीं है तो पानी को कम से कम 1 मिनिट उबाले और बाद में ठंडा होने के बाद में ही उपयोग करे। अगर कही बाहर सफ़र कर रहे है तो बोतलबंद पानी का उपयोग करे। घर में सब्जी / फल को साफ़     करने के लिए भी स्वच्छ पानी का ही इस्तेमाल करे। बाहर मिलने वाले बर्फ का इस्तेमाल न करे। 

    हात धोना : हमेशा खाना बनाने या खाने से पहले और बाथरूम के बाद अच्छे साबुन से हात धोना चाहिए।हात धोते समय साबुन से अच्छा झाग बनाकर १५ सेकंड तक बहते पानी में हात को अच्छी तरह से धोए और बाद में स्वच्छ कपडे से हात को अच्छी तरह से साफ़         करे। नल बंद करने के लिए उसी साफ कपडे का इस्तेमाल करे जिससे हात को दुबारा दूषण (Contamination) न हो। अगर पानी उपलब्ध नहीं है तो अपने साथ हात साफ़ रखने के लिए Hand sanitizer पास रखे। 

    आहार : घर में बना स्वच्छ, गर्म और पौष्टिक आहार लेना चाहिए। बाजार में और रस्ते पर बिकनेवाले आहार पदार्थो से परहेज करे। 

    रोगी : अगर आपको Typhoid बुखार हैं तो आपने हमेशा अपने हात साफ़ और स्वच्छ रखना चाहिए। आपके कपडे, चद्दर, तौलिया इत्यादि गर्म पानी और साबुन से धोना चाहिए। आपने अन्य खाद्य पदार्थो को नहीं छूना चाहिए और औरो के लिए खाना नहीं पकाना चाहिए।  

    Typhoid बुखार सबंधी उपयोगी जानकारी देने की कोशिश यहाँ पर की गयी हैं। अधिक जानकारी हेतु कृपया

    अपने डॉक्टर से संपर्क करे और उनके निर्देशों का पालन करे। 

 

Wednesday, 23 November 2016 05:57

Dengue Fever यह एक viral बीमारी है जो की Dengue virus के 4 प्रकारों में से किसी एक प्रकार के Dengue virus से होता है। जब कोई रोगी Dengue Fever से ठीक हो जाता है, तब उस मरीज को उस एक प्रकार के Dengue virus से लम्बे समय के लिए प्रतिरोध / immunity मिल जाती है परन्तु अन्य 3 प्रकार के Dengue virus से Dengue Fever दोबारा हो सकता है। दूसरी बार होने वाला Dengue Fever काफी गंभीर हो सकता है जिसे Dengue Hemorrhagic Fever कहते है।

Dengue Fever कैसे होता है ?

Dengue Fever हवा, पानी, साथ खाने से या छूने से नहीं फैलता है। Dengue Fever संक्रमित स्त्री / मादा जाती के Aedes aegypti  नामक मच्छर के काटने से होता है। अगर किसी व्यक्ति को Dengue Fever है और उस व्यक्ति को यह मच्छर काट कर उसका खून पिता है तो उस मच्छर में Dengue virus युक्त खून चला जाता है। जब यह संक्रमित मच्छर किसी स्वस्थ व्यक्ति को काट लेता है तो Dengue virus उस स्वस्थ व्यक्ति में चला जाता है।

 

Aedes aegypti  मच्छर की कुछ खास विशेषताए निचे दी गयी है :

 

    यह दिन में ज्यादा सक्रिय होते है। 

    इन मच्छर के शरीर पर चीते जैसी धारिया होती है। 

    ज्यादा ऊपर तक नहीं उड़ पाते है।

    ठन्डे और छाव वाले जगहों पर रहना ज्यादा पसंद करते है।  

    पर्दों के पीछे या अँधेरे वाली जगह पर रहते है। 

    घर के अन्दर रखे हुए शांत पानी में प्रजनन / breeding करते है। 

    अपने प्रजनन क्षेत्र के 200 meter की दुरी के अन्दर ही उड़ते है। 

    गटर या रस्ते पर जमा खराब पानी में कम प्रजनन करते है।  

    पानी सुख जाने के बाद भी इनके अंडे 12 महीनो तक जीवित रह सकते है। 

 

Dengue Fever के लक्षण क्या है ?

 

संक्रमित मच्छर के काटने के 3 से 14 दिनों बाद Dengue Fever के लक्षण दिखने शुरू होते है। Dengue Fever के लक्षण निचे दिए गए है :

 

    तेज ठंडी लगकर बुखार आना 

    सरदर्द 

    आँखों में दर्द 

    बदनदर्द / जोड़ो में दर्द 

    भूक कम लगना 

    जी मचलाना, उलटी 

    दस्त लगना 

    चमड़ी के निचे लाल चट्टे आना 

    Dengue Hemorrhagic Fever की गंभीर स्तिथि में आँख, नाक में से खून भी निकल सकता है  

 

Dengue Fever का इलाज क्या है ?

 

    Dengue Fever का रोकथाम / Prevention ही इसका सबसे अच्छा  और बेहतर ईलाज है। 

    Dengue Fever की कोई विशेष दवा या vaccine नहीं है। 

    एक viral रोग होने के कारण इसकी दवा निर्माण करना बेहद कठिन कार्य है। 

    Dengue Fever के इलाज / चिकित्सा में लाक्षणिक चिकित्सा / symptomatic treatment की जाती है। 

    Dengue Fever की कोई दवा नहीं है पर इस रोग से शरीर पर होने वाले side-effects से बचने के लिए रोगी को डॉक्टर की सलाह अनुसार आराम करना चाहिए और समय पर दवा लेना चाहिए। 

    रोगी को पर्याप्त मात्रा में आहार और पानी लेना चाहिए। बुखार के लिए डॉक्टर की सलाह अनुसार paracetamol लेना चाहिए। डेंगू बुखार में रोगी ने पर्याप्त मात्रा में पानी पीना सबसे ज्यादा आवश्यक हैं। 

    बुखार या सरदर्द के लिए Aspirin / Brufen का उपयोग न करे।  

    डॉक्टर की सलाह अनुसार नियमित Platelet count की जाँच करना चाहिए। 

    हमारी रोगप्रतिकार शक्ति Dengue Fever से लड़ने में सक्षम होती है, इसलिए हमें हमेशा योग्य संतुलित आहार और व्यायाम द्वारा रोग प्रतिकार शक्ति को बढाने की कोशिश करनी चाहिए। 

 

Dengue Fever के बचाव के उपाय क्या है ?

 

जैसे की मैंने पहले भी लिखा है, Dengue Fever का रोकथाम / Prevention ही इसका सबसे बेहतर ईलाज है। 

Dengue Fever के बचाव के उपाय निचे दिए गए है :

 

    घर के अन्दर और आस-पास पानी जमा न होने दे। कोई भी बर्तन में खुले में पानी न जमने दे। 

    बर्तन को खाली कर रखे या उसे उलटा कर कर रख दे। 

    अगर आप किसी बर्तन, ड्रम या बाल्टी में पानी जमा कर रखते है तो उसे ढक कर रखे। 

    अगर किसी चीज में हमेशा पानी जमा कर रखते है तो पहले उसे साबुन और पानी से अच्छे से धो लेना चाहिए, जिससे मच्छर के अंडे को हटाया जा सके।  

    घर में कीटनाशक का छिडकाव करे। 

    कूलर का काम न होने पर उसमे जमा पानी निकालकर सुखा कर दे। जरुरत होने पर कूलर का पानी रोज नियमित बदलते रहे। 

    किसी भी खुली जगह में जैसे की गड्डो में, गमले में या कचरे में पानी जमा न होने दे। अगर पानी जमा है तो उसमे मिटटी डाल दे। 

    खिड़की और दरवाजे में जाली लगाकर रखे। शाम होने से पहले दरवाजे बंद कर दे। 

    ऐसे कपडे पहने जो पुरे शरीर को ढक सके। 

    रात को सोते वक्त मच्छरदानी लगाकर सोए। 

    अन्य मच्छर विरोधी उपकरणों का इस्तेमाल करे जैसे की electric mosquito bat, repellent cream, sprays etc. 

    अगर बच्चे खुले में खेलने जाते है तो उने शरीर पर mosquito repellent cream लगाए और पुर शरीर ढके ऐसे कपडे पहनाए। 

    अपने आस-पास के लोगो को भी मच्छर को फैलने से रोकने के लिए प्रोत्साहित करे। 

    अपने आस-पास में अगर कोई Dengue Fever या Malaria के मरीज का पता चलता है तो इसकी जानकारी स्वास्थय विभाग एवं नगर निगम को दे, जिससे तुरंत मच्छर विरोधी उपाय योजना की जा सके।  

    Dengue Fever के ज्यादातर मरीजो की मृत्यु platelet या खून के अभाव में होती है। मेरी आप सभी से request है की जरुरत के समय रक्तदान / Blood Donation करने से बिलकुल न घबराए और साल में कम से कम दो बार Blood Donation जरुर करे। 

    कई लोग Dengue Fever में Platelet Count बढाने के लिए पपीते के पत्ते का रस पिने के सलाह देते है। पपीते के पत्ते का रस पिने के बाद कई मरीजो में platelet count में सुधार होते हुए देखा गया है। इसका कोई ठोस पुरावा नहीं है और न कोई research हुआ है। अब बाजार में पपीते के extract की दवा भी मिलती है जो की डॉक्टर जरुरत होने पर आपको लेने की सलाह दे सकते हैं। 

 

Wednesday, 23 November 2016 05:32

अग्निमांद्य - अपच (खराब हाजमा) 
क्यो और कैसे --
यह रोग जठराग्नि (भोजन पचाने की क्रिया) के धीमे होने से उत्पन्न होता है। 
मल - मूत्र, छीक, उबकाई, हिचकी, अधोवायु आदि वेगो के रोकने से। 
देर रात्रि तक जागना, कम निद्रा, अधिक शोक, गुस्सा, भय,चिंतित रहना, ईर्षा, निरंतर क्लेश दुख प्रमुख छुपे कारण है जिन्हें अकसर लोग नहीं समझ पाते हैं !

प्रभाव क्षेत्र --(शारीरिक) 
अफारा, पेट फूलना, मल विबंध (पेट साफ रहना), भूख होने पर भी खाना देखते ही अरुचि, 
शिर, वदन दर्द, उत्साह कम, हृदय पर भारी पन भोजन पश्चात उलटी होना! 
प्रभाव क्षेत्र -- मनस (मानसिक) --
लोगों को उत्तर देते समय खीझ, 
मृत्यु की बात सोचना, 
अक्सर दिल की धड़कन बढी समझना -जो वास्तव में सोचते ही बढ़ जाती है!
व्यक्ति अकसर रोग के बारे में ही सोचता रहता है *
*(IBS) irritable bowel Syndrome!!

ध्यान रखें --- उच्च रक्तचाप (high BP) की शुरुआत इसी रोग से होती है!!

उपचार -- (सहज-सुलभ)

देशी मूली का रस 1 चम्मच 
प्याज का रस 1 चम्मच 
4
गेहूं बराबर सेंधा नमक 
1
गेहूं बराबर हींग साधारण 
एक में मिलाकर 1/4 कप ताजा जल के साथ 
सुबह दोपहर 5 दिन तक या अधिक आवश्यकतानुसार  
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? एक ही मात्रा से लाभ शुरू होगा !

उपचार -- (शास्त्रीय) 
शन्ख वटी 
2
गोळी सुबह दोपहर शाम जल के साथ मन्दाग्नि के लिए पक्का विश्वसनीय उपचार है।

उपचार -- (सुगन्ध चिकित्सा) (Aromatherapy)

स्वयम् बनाइये - मुस्कुराहट जगाइये!! https://www.facebook.com/images/emoji.php/v6/f7f/1/16/1f60a.png? https://www.facebook.com/images/emoji.php/v6/f7b/1/16/1f44c.png?

लीजिए लाखों रूपए मूल्य का फार्मूला मुफ्त में भेट है, 
स्वीकार करें!!

कपूर ( camphor) 10 gm

अजवायन सत
(Ajowan ext.) 10 gm

पुदीना तैल 
(spearmint oil) 10 gm

नीलगिरी तैल 
(eucalyptus oil) 5 gm

पिपरमेंट तैल 
(mentha oil) 5 gm

लवंग तैल (clove iol) 2 gm

यह सभी किसी भी अच्छे अत्तार के यहाँ साधारण मूल्य पर उपलब्ध रहती हैं।

सभी को एक साफ शीशी में भरकर हिलाकर ढक्कन लगाकर रखें 60 मिनट बाद फिर हिलाएं, बस आपकी खुशबूदार , जादू भरी "सुगंध धारा" (प्रचलित अमृत धारा से ज्यादा कारगर) 
तैयार है!!

दो-चार बूँद बताशा, चीनी की गोलियों या जल के साथ दिनभर में 2 या 3 बार। 
अथवा कुछ बूंद साफ रूमाल में डालकर सुघाये, 
जुकाम में भी कारगर है!

?सुधीजन बनाकर उचित मूल्य में बेचकर साल में लाखों कमा सकते हैं!!

 

सादर समर्पित -
वैधराज मदन मोहन सिंह